
गौरीशंकर गुप्ता/रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल राज्य प्रशासन को झकझोर दिया बल्कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes – NCST) को भी तुरंत एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया। आरोप है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर उच्च पद, जिसमें राज्य स्तर की कमिश्नर स्तरीय कुर्सी भी शामिल मानी जा रही है, हासिल की थी, जिसके बाद आयोग ने तत्काल जांच और दंडात्मक कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला कई वर्षों से चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें राज्य के कुछ उच्च पदस्थ अधिकारियों पर जनजाति प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आरोपी अधिकारी ने जनजाति वर्ग में आने की दशा में उपलब्ध आरक्षण और अन्य लाभों का गलत फायदा उठाकर न केवल नौकरी प्राप्त की, बल्कि बाद में उच्च पदों पर भी तैनाती करवाई। इस बात की जांच में राज्य स्तर की जांच कमेटी ने आरोपी प्रमाण पत्र को फर्जी ठहराते हुए उसकी पुष्टि केंद्र सरकार को भेजी, जिसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया।
आयोग ने राज्य सरकार और राज्य स्तरीय जांच प्राधिकरण को तुरंत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए और फर्जी कागजात के आधार पर उच्च पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही आयोग ने राज्य सरकार से यह जानकारी भी मांगी कि ऐसे कितने और अधिकारी उच्च पदों पर फर्जी आरक्षण के आधार पर तैनात हैं, ताकि जनजाति वर्ग के वास्तविक लाभार्थियों को न्याय मिल सके। पुष्टि होते ही आयोग ने कानूनी कार्रवाई और पद से हटाने की सिफारिश तक का रास्ता खुला रखा है।
पहले से चल रही फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की जांच की पृष्ठभूमि में यह मामला और भी गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि यहां आरोपी अधिकारी केवल एक सामान्य पद पर नहीं, बल्कि कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे थे, जिस पर बड़े नीति निर्णय और जनजातीय विकास योजनाएं भी निर्भर करती हैं। स्थानीय जनजाति संगठनों ने रायपुर से लेकर दिल्ली तक इस मामले को उठाया है और फर्जी कागजात पर नौकरी देने वाले अधिकारियों और जांच करने वाले तंत्र पर भी कड़ा सवाल उठाया है।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले से छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में प्रमाण पत्र जारी करने, जांच करने और उच्च पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की मांग तेज होगी। राष्ट्रीय जनजाति आयोग की कड़ी रुख ने यह संकेत भी दिया है कि फर्जीवाड़े के जरिये आरक्षण का गलत लाभ लेने वालों के खिलाफ अब केवल राज्य स्तरीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सख्ती की जाएगी।




