रायगढ़ में रिश्वतखोर बाबू गिरफ्तार: सर्पदंश मुआवजे के लिए मांगे 50 हजार
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्ट्रेट के राहत और आपदा प्रबंधन शाखा के बाबू राजकुमार सिदार को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. आरोपी सर्पदंश से हुई मृत्यु के मुआवजे की राशि बैंक खाते में डलवाने के लिए यह घूस मांग रहा था. शिकायतकर्ता विजय सिदार की पत्नी की मृत्यु 2023 में सर्पदंश से हुई थी. ACB ने शिकायत की पुष्टि के बाद यह कार्रवाई की. आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के राहत और आपदा प्रबंधन शाखा के एक बाबू को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी मंगलवार को उस समय हुई जब बाबू राजकुमार सिदार एक पीड़ित से सर्पदंश से हुई मृत्यु के मुआवजे की राशि बैंक खाते में हस्तांतरित करने के एवज में रिश्वत ले रहा था.
मामले की जानकारी के अनुसार, पुसौर तहसील के ग्राम बुलाकी निवासी विजय सिदार ने बिलासपुर स्थित एसीबी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी. विजय सिदार ने बताया कि उनकी पत्नी रामकुमारी की मृत्यु वर्ष 2023 में सर्पदंश के कारण हो गई थी. शासन की योजना के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि प्राप्त करने के लिए उन्होंने राजस्व विभाग में आवेदन किया था. यह प्रकरण रायगढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय में लंबित था.
विजय सिदार ने मुआवजा राशि के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के लिए कलेक्ट्रेट कार्यालय के आपदा प्रबंधन शाखा के बाबू राजकुमार सिदार से संपर्क किया. विजय की शिकायत के मुताबिक, बाबू राजकुमार सिदार ने मुआवजा राशि को उनके बैंक खाते में जमा कराने के बदले 50,000 रुपये की मांग की थी. इतना ही नहीं, बाबू ने मुआवजे की राशि मिलने के बाद अतिरिक्त 50,000 रुपये और देने की शर्त रखी थी.
शिकायत मिलने के बाद, एसीबी की टीम ने मामले की गहन जांच की. शिकायत सही पाए जाने पर मंगलवार को कार्रवाई की योजना बनाई गई. एसीबी की टीम ने छापा मारकर बाबू राजकुमार सिदार को प्रार्थी विजय सिदार से 50,000 रुपये का चेक लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. एसीबी के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने रिश्वत की रकम की गारंटी के लिए हस्ताक्षर किया हुआ चेक मांगा था, जो कि एक असामान्य तरीका है और इस तरह पकड़े जाने का यह संभवतः पहला मामला है.
गिरफ्तारी के बाद, आरोपी राजकुमार सिदार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. इस कार्रवाई से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के प्रयासों को बल मिला है.




