रायगढ़ में काल के आगे जीती मां की ममता; हाथी ने मां को कुचला, शव के पास खेलती रही दुधमुंही बच्ची

रायगढ़। रायगढ़ जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार तड़के धरमजयगढ़ वनमंडल के दो अलग-अलग वन परिक्षेत्रों में हाथियों के हमले में दो लोगों की जान चली गई। सबसे मार्मिक घटना कापू वन परिक्षेत्र के तालगांव की है, जहां अपनी दुधमुंही बच्ची को सीने से लगाकर जान बचाने के लिए भाग रही महिला को हाथी ने दौड़ाकर पटक दिया। गंभीर रूप से घायल महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया, जबकि उसकी मासूम बच्ची चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गई। दूसरी घटना छाल वन परिक्षेत्र के औरानारा गांव की है, जहां हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौके पर ही मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, कापू वन परिक्षेत्र के तालगांव बस्ती में शनिवार सुबह करीब चार बजे एक जंगली हाथी जंगल से निकलकर गांव में घुस आया। हाथी की चिंघाड़ सुनते ही ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
इसी दौरान एक महिला अपनी दुधमुंही बच्ची को लेकर घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर भाग रही थी। हाथी ने उसका पीछा किया और उसे पटक दिया। गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल कापू अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना में उसकी दुधमुंही बच्ची सुरक्षित बच गई, जिसने पूरे घटनाक्रम को और भी मार्मिक बना दिया।
औरानारा में ग्रामीण को दौड़ाकर मार डाला
इधर, छाल वन परिक्षेत्र के औरानारा गांव के पास भी हाथी ने एक ग्रामीण पर हमला कर दिया। हाथी को देखकर ग्रामीण जान बचाने के लिए भाग रहे थे, लेकिन हाथी ने पीछा करते हुए बंधन अगरिया को अपनी चपेट में ले लिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटनाओं की सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। दोनों मामलों में पंचनामा और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही आसपास के गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने तथा हाथियों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।
वन विभाग की गाड़ी पर भी किया हमला
तालगांव में घटना के बाद जब वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, तब आक्रामक हाथी ने विभाग की एक गाड़ी पर भी हमला कर दिया। हमले में वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद वन अमले ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए हाथी की निगरानी शुरू कर दी है। प्रभावित गांवों में लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी अन्य अप्रिय घटना को रोका जा सके।
मां नहीं बच सकी, लेकिन दुधमुंही बच्ची को हाथी ने नहीं छुआ
तालगांव की घटना ने हर किसी को भावुक कर दिया। हाथी के हमले में मां की जान चली गई, लेकिन उसकी दुधमुंही बच्ची पूरी तरह सुरक्षित बच गई। ग्रामीण इसे ईश्वर की कृपा मान रहे हैं। संत कबीरदास का प्रसिद्ध दोहा—जाको राखे साइयां, मार सके न कोय इस घटना में सच साबित होता नजर आया। मां ने अपनी आखिरी सांस तक बच्ची को बचाने की कोशिश की और बच्ची को कोई चोट नहीं पहुंची।
रायगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष गहराया, अब तक 11 लोगों की जा चुकी है जान
रायगढ़ जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। इस वर्ष अब तक हाथियों के हमलों में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। धरमजयगढ़, कापू, छाल, घरघोड़ा और लैलूंगा क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं। लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और मानव-हाथी संघर्ष को रोकने की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी समाधान नहीं निकलने से हर दिन जान का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों में दहशत, गमगीन माहौल में गुजरा दिन
लगातार हाथियों की आवाजाही से प्रभावित गांवों में भय का माहौल है। ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं और हाथियों की सूचना एक-दूसरे तक पहुंचा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि खेत, घर और रोजमर्रा की जिंदगी सभी प्रभावित हो गए हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की निगरानी बढ़ाने, त्वरित चेतावनी प्रणाली और स्थायी सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है। वही इस हास्य के बाद ग्रामीण का दिन भर गमगीन माहौल में गुजरा है।




