रायपुर

प्रगतिशील किसान:अंबिकापुर की सुरबिल दास 2 सीजन में उगा रहीं 4 टन मशरूम, एक फसल के बाद मिट्टी का सुपर जैविक खाद बनाकर फिर इस्तेमाल — ताजा अपडेट

15 अगस्त विज्ञापन

अंबिकापुर बंगाली चौक डीसी रोड के पास रहने वाली सुरबिल दास मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में जाना-माना नाम बन चुकी हैं। सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक के ग्राम गोरता की रहने वाली सुरबिल पिछले पांच साल से मशरूम की खेती कर रही हैं। अपनी लगन और मेहनत के दम पर वे न सिर्फ मशरूम उत्पादन की नेशनल ट्रेनर बन गई हैं, बल्कि सुभाष महिला स्व-सहायता समूह का सक्रिय संचालन भी कर रही हैं। मशरूम उत्पादन के प्रति उनके नवाचार और प्रशिक्षण कौशल को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, अंबिकापुर ने उन्हें 20X28 के दो सेटअप और जगह उपलब्ध कराई है। सुरबिल साल में दो सीजन में मशरूम का उत्पादन करती हैं। पिछले साल ही उन्होंने 2.5 टन ऑयस्टर और 1.50 टन बटन मशरूम का बंपर उत्पादन किया था। सुरबिल ने बताया कि इस साल भी उन्होंने ऑयस्टर मशरूम लगा दिया है और बटन मशरूम के लिए कम्पोस्ट तैयार है। सुरबिल की खेती की सबसे खास बात यह है कि वे शून्य अपशिष्ट तकनीक अपनाती हैं। वे मशरूम की वेस्टेज मिट्टी को फेंकने के बजाय उससे बेहतरीन जैविक खाद तैयार करती हैं। इससे उन्हें खेती में बिना रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किए बिना पैदावार कई गुना तक बढ़ी है। जरूरत के अनुसार वे इस सुपर जैविक खाद की बिक्री भी करती हैं, जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है। इतना ही नहीं, वे केवल मशरूम उगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) के क्षेत्र में भी नवाचार कर रही हैं। वे मशरूम से बडी, अचार और पापड़ तैयार कर बाजार में बेचती हैं, जिससे उपज का पूरा सदुपयोग होता है। सुरबिल केवल अपने मुनाफे तक सीमित नहीं हैं, वे दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। एक नेशनल ट्रेनर के रूप में वे अब तक 500 से अधिक लोगों को मशरूम उगाने की बारीकियां सिखा चुकी हैं। वर्तमान में उनका दायरा और बढ़ गया है। वे जिले के 20 से 25 अलग-अलग गांवों में जाकर महिलाओं को न सिर्फ मशरूम उगाने की तकनीकी जानकारी दे रही हैं, बल्कि फूड प्रोसेसिंग भी सिखा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को यह सिखाना है कि कैसे वे घर पर ही मशरूम से उपज तैयार कर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। एक सामान्य महिला किसान होने के बावजूद सुरबिल की विशेषज्ञता का लाभ अब कृषि के छात्र भी ले रहे हैं। वे सिलफिली स्थित महात्मा गांधी उद्यानिकी कॉलेज में भी मशरूम लगवाने और तकनीकी मार्गदर्शन देने का कार्य कर रही हैं। इन प्रगतिशील किसान से और जानें: मशरूम उत्पादन, जीरो-वेस्ट तकनीक और फूड प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग या मार्गदर्शन के लिए सुरबिल दास से संपर्क किया जा सकता है। मोबाइल नंबर: 6261836685

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!