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मुंगेली सेंट्रल बैंक में फर्जीवाड़ा: नौकरी सुरेश कर रहा…वेतन छोटे भाई के खाते में; एक साथ दो नौकरी का खेल

15 अगस्त विज्ञापन


मुंगेली-सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा में एक चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बैंक में फर्जी नियुक्ति कराई गई, जहां काम कोई और कर रहा है, जबकि वेतन किसी अन्य व्यक्ति के खाते में जा रहा है। 

जानकारी के अनुसार, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया मुंगेली ब्रांच में सुरेश महिलाग नामक युवक अप्रेन्टिस के पद पर कार्य कर रहा था। लेकिन जिस दस्तावेज़ के आधार पर उसकी नियुक्ति दिखाई गई, वे उसके छोटे भाई विकास महिलाग के बताए जा रहे हैं। विकास महिलाग पहले से ही जिला अस्पताल मुंगेली में कार्यरत है।

एक व्यक्ति और दो नौकरी, एक ही खाता


  • आरोप है कि विकास महिलाग को दो अलग-अलग संस्थानों से वेतन मिल रहा था।

  • सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया से ₹10,500 प्रति माह

  • जिला अस्पताल मुंगेली से ₹5,500 प्रति माह


दोनों ही जगहों का वेतन एक ही बैंक खाते में ट्रांसफर किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि एक ही दिन और माह में जिला अस्पताल और बैंक-दोनों जगह ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कागजों में एक व्यक्ति को दो स्थानों पर कार्यरत दिखाया गया।

मैनेजर की भूमिका पर गंभीर सवाल 

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा फर्जीवाड़ा बैंक मैनेजर की सहमति और संरक्षण में किया गया। आरोप है कि वर्तमान मैनेजर ने अपने चहेते के लिए नियमों को ताक पर रखकर बैंक जैसी संवेदनशील संस्था में एक अनजान और अप्रमाणित व्यक्ति को कंप्यूटर संचालन, खाता एंट्री सहित अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य सौंप दिए। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बैंक की सुरक्षा में गंभीर चूक भी मानी जा रही है।

लोक अदालत में भी गड़बड़ी के आरोप

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। शासन-प्रशासन द्वारा कर्जदारों को राहत देने के लिए आयोजित लोक अदालत में भी बैंक मैनेजर की भूमिका पर सवाल उठे हैं। आरोप है कि लोक अदालत के दौरान बैंक की ओर से फर्जी रूप से कार्यरत सुरेश महिलाग को बैठाया गया, जो कर्जदारों को यह कहकर लौटा देता था कि “मैनेजर मौजूद नहीं हैं, बैंक में आकर बात करें। इस कारण, मैनेजर के कार्यकाल में बैंक के कर्जदारों को लोक अदालत का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जांच और कार्रवाई की मांग

इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब बैंक जैसी संस्था में इस तरह का फर्जीवाड़ा संभव है, तो आम नागरिकों की जमा पूंजी कितनी सुरक्षित है, इस पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। मांग की जा रही है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी बैंक मैनेजर और फर्जी रूप से कार्य करने वाले व्यक्तियों पर कठोर और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।



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