Medical Colleges: सरकारी मेडिकल कॉलेजों पर लटकी एनएमसी की तलवार, सीटों में कटौती की आशंका | Medical Colleges: Seats in government medical colleges of Chhattisgarh may be reduced

Medical Colleges: निरीक्षण ऑनलाइन हुआ
एनएमसी ने डीएमई व सभी डीन की बैठक में कॉलेजों को अलर्ट भी किया है कि कमियां दूर कीजिए, नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहिए। नया सत्र अगले माह शुरू होगा। इसके पहले नेशनल मेडिकल कमीशन सभी कॉलेजों को मान्यता देगा। मान्यता के पहले सभी कॉलेजों का निरीक्षण किया गया है। यह निरीक्षण ऑनलाइन हुआ है। काउंसलिंग इस माह शुरू होने की संभावना है। इससे पहले कॉलेजों की मान्यता जरूरी है। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि नेहरू मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर व एडवांस मशीनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन सीनियर रेसीडेंट कम है।
इसके चलते भी सीटें कम होने की संभावना बनी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पूरी सीटों की मान्यता मिल ही जाएगी। कांकेर, महासमुंद, कोरबा, दुर्ग समेत दूसरे कॉलेजों में फैकल्टी की सबसे ज्यादा कमी है। पिछले साल सिम्स बिलासपुर में एमबीबीएस की 30 सीटें कम कर दी गईं थीं। इस कारण चिकित्सा शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ गई है। अब एनएमसी के पत्र का इंतजार किया जा रहा है। 15 जुलाई तक मान्यता संबंधी पत्र आने की संभावना है।
निजी कॉलेज जुगाड़ से मान्यता की फिराक में
नवा रायपुर स्थित रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में सीबीआई की रेड के बाद स्पष्ट हो गया है कि कुछ निजी कॉलेज असेसर (एनएमसी के निरीक्षक) को पैसे खिलाकर मान्यता लेने की फिराक में है। पिछले साल ही कॉलेज को मान्यता मिली थी और इस साल 150 से 250 सीटें बढ़ाने के लिए निरीक्षण किया गया। इसमें 25 लाख रुपए की लेनदेन की खबर सामने आई है।
सीबीआई ने असेसर समेत कॉलेज के डायरेक्टर समेत 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। इस रेड के बाद मेडिकल जगत में इस बात की चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या निजी कॉलेज पैसे के दम पर मान्यता लाते है? पत्रिका को आधा दर्जन से ज्यादा डॉक्टरों का फोन आया कि ज्यादातर निजी कॉलेज लेनदेन कर मान्यता की फिराक में रहते हैं। हालांकि कुछ कॉलेज के डायरेक्टरों ने कहा कि अगर कॉलेज में फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर, मरीज, सर्जरी की संख्या या एडवांस मशीनें हैं तो किसी असेसर को पैसे खिलाने की जरूरत नहीं है।
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Medical Colleges: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की स्थिति, कॉलेज पद स्वीकृत खाली
रायपुर: प्रोफेसर 38 01
एसो. प्रोफेसर 91 29
असि. प्रोफेसर 166 76 बिलासपुर: प्रोफेसर 24 10
एसो. प्रोफेसर 63 33
असि. प्रोफेसर 93 45
एसो. प्रोफेसर 33 11
असि. प्रोफेसर 50 29 रायगढ़: प्रोफेसर 22 11 एसो. प्रोफेसर 19 05
असि. प्रोफेसर 40 17 राजनांदगांव: प्रोफेसर 23 13
सो. प्रोफेसर 30 14
असि. प्रोफेसर 50 37
अंबिकापुर: प्रोफेसर 19 06
एसो. प्रोफेसर 26 10
असि. प्रोफेसर 40 06 कांकेर: प्रोफेसर 24 21
एसो. प्रोफेसर 33 28
असि. प्रोफेसर 46 34 कोरबा: प्रोफेसर 24 21
एसो. प्रोफेसर 33 23
असि. प्रोफेसर 46 22 महासमुंद: प्रोफेसर 24 17
एसो. प्रोफेसर 33 13
असि. प्रोफेसर 46 26
दुर्ग: प्रोफेसर 21 13
एसो. प्रोफेसर 38 30
असि. प्रोफेसर 67 40 कुल स्वीकृत पद इस तरह पद स्वीकृत खाली
प्रोफेसर 241 117 एसो. प्रोफेसर 399 196
असि. प्रोफेसर 644 332 सीनियर रेसीडेंट 518 375
(डीएमई कार्यालय के अनुसार)
Medical Colleges: डॉ. यूएस पैकरा, डीएमई छत्तीसगढ़: रायपुर ही आरेंज जोन में है, बाकी 9 कॉलेज रेड जोन में है। एमबीबीएस की सीटें घटेंगी या नहीं, यह एनएमसी के पत्र के बाद स्पष्ट होगा। हमें उम्मीद है कि सभी कॉलेजों को नए सत्र के लिए मान्यता मिल जाएगी। एनएमसी की बताई गई कमियों को दूर किया जा रहा है।




