राजनीति

मतदान का अधिकार संविधान ने दिया है, चुनाव आयोग नहीं: चंद्र कुमार बोस

15 अगस्त विज्ञापन

नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने कहा है कि मतदान का अधिकार संविधान ने दिया है, कोई सरकार या चुनाव आयोग हमें यह अधिकार नहीं देता। चुनाव आयोग को किसी वास्तविक मतदाता का नाम काटने का अधिकार नहीं है। अगर किसी दस्तावेज या रिकॉर्ड में गलती है तो उसे ठीक किया जाना चाहिए, लेकिन गलती के कारण वास्तविक मतदाता को वोट देने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। एसआईआर में भी यही बात देखनी होगी कि वास्तविक मतदाता का नाम सूची में बना रहे।

चंद्र कुमार बोस शनिवार को मेमन जमात कॉन्फ्रेंस में शामिल होने रायपुर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। उन्होंने इन दिनों देश में बहस का मुद्दा बने एसआईआर और मतदाता सूची पर कहा कि चुनाव आयोग के सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

मतदाता सूची की जांच में एआई-तकनीक के प्रयोग पर सवाल उठने के संबंध में उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। स्पेलिंग या मामूली त्रुटियों के कारण वैध वोटरों के नाम सूची से नहीं हटाए जाने चाहिए, बल्कि गलतियों को सुधारा जाना चाहिए। एआई के साथ-साथ मैनुअल चेकिंग की जरूरत है।

इस सूची में उनका रिकॉर्ड भी नहीं मिलने के सवाल पर चंद्र कुमार बोस ने कहा कि कई लोगों को पुराने रिकॉर्ड में नाम नहीं मिलने या किसी गलती के कारण बुलाया जा रहा है। मुझे भी सुनवाई के लिए बुलाया गया था। मेरा मानना है कि गलती होने पर मतदाता को परेशान करने के बजाय रिकॉर्ड को ठीक करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

चुनाव व्यवस्था पर भरोसा घटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी तो सवाल उठेंगे। चुनाव आयोग को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। पारदर्शिता से ही लोगों का भरोसा मजबूत होगा।

देश में पक्ष-विपक्ष की राजनीति पर क्या कमी देखते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि देश राजनीति से ऊपर है। नेताजी ने भी राजनीति की, लेकिन देश के लिए बलिदान दिया। आज के नेताओं को राजनीति कम और देश के काम पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

क्या आंदोलन-इस्तीफे से सिस्टम सुधारा जा सकता है, इस सवाल पर चंद्र कुमार बोस ने कहा कि सिर्फ एक-दो मंत्री का इस्तीफा कराने से समाधान नहीं होगा। अगर समस्या व्यवस्था में है तो पूरी व्यवस्था को बदलना पड़ेगा। भ्रष्टाचार अलग-अलग स्तर पर चला गया है, इसलिए सिस्टम में सुधार जरूरी है। सिर्फ सड़क पर उतरने से समस्या हल नहीं होगी।

आत्मनिर्भर भारत के सामने बड़ी चुनौती क्या देखते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का विचार सही है, लेकिन इसे वास्तविकता में बदलने के लिए अभी और आगे जाना होगा। यूनिटी जरूरी है। विभाजन से और आत्मनिर्भर भारत नहीं बना सकते।

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