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Maharashtra: ‘युवाओं ने लोकतंत्र को दी ऑक्सीजन’, उद्धव ने प्रदर्शन को क्यों बताया सरकार और विपक्ष की नाकामी?

15 अगस्त विज्ञापन


नीट पेपर लीक विवाद और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने युवा आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सीजेपी के नेतृत्व में चला आंदोलन सिर्फ एक मंत्री के खिलाफ विरोध नहीं था, बल्कि यह लोकतंत्र को नई ताकत देने वाला अभियान साबित हुआ। ठाकरे ने कहा कि यह प्रदर्शन बताता है कि देश के लोग अब अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आगे आ रहे हैं और यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।

सामना के कार्यकारी संपादक और शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत को दिए एक इंटरव्यू में उद्धव ठाकरे ने कहा कि सीजेपी का आंदोलन सरकार और विपक्ष दोनों की नाकामी को दिखाता है। उनका कहना था कि देश के लोगों का भरोसा नेताओं से कम हुआ है और इसी वजह से युवाओं ने खुद सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठाई। यह इंटरव्यू धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले रिकॉर्ड किया गया था और रविवार को प्रकाशित हुआ।

युवा आंदोलन को लोकतंत्र की ऑक्सीजन क्यों बताया?

उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह आंदोलन ऐसे समय में हुआ जब लोकतंत्र कमजोर होता दिखाई दे रहा था। उनके मुताबिक, इस प्रदर्शन ने लोकतंत्र को नई ऑक्सीजन दी है। उन्होंने कहा कि यह सराहनीय है कि लोग अब जेल या हथियारों के डर से पीछे नहीं हट रहे हैं। उनका दावा था कि लोगों के मन से डर खत्म होना सत्तारूढ़ दल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ठाकरे ने कहा कि दिल्ली से मुंबई तक उन्हें यह महसूस हुआ कि लोग अब अपनी बात खुलकर रखने के लिए तैयार हैं।

सरकार पर और क्या आरोप लगाए?


  • पूर्व महाराष्ट्र मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को सिर्फ उम्मीदें दिखाई जा रही हैं, लेकिन लोगों को वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि नीट पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ विरोध केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं था, बल्कि पिछले 12 वर्षों के असंतोष और विश्वासघात का विस्फोट था। ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है और उसने देश को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहना उनका अपमान है।

  • धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे से पहले सीजेपी के नेतृत्व में कई सप्ताह तक देशभर में आंदोलन चला। इस आंदोलन में परीक्षा में कथित अनियमितताओं और नीट पेपर लीक को लेकर कार्रवाई की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई थी।

  • सीजेपी की स्थापना अभिजीत दीपके ने की थी। पिछले कुछ सप्ताह में यह संगठन देशव्यापी युवा आंदोलन के रूप में उभरा और बड़ी संख्या में युवाओं ने इसमें हिस्सा लिया। आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। इसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं का यह आंदोलन लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है और इससे सरकार तथा विपक्ष दोनों को सबक लेना चाहिए।

सरकार और विपक्ष दोनों को क्यों ठहराया जिम्मेदार?

ठाकरे ने कहा कि सीजेपी का आंदोलन केवल सत्तारूढ़ दल की विफलता नहीं है, बल्कि विपक्ष की भी नाकामी है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि देश के लोगों का भरोसा राजनीतिक दलों से कम होता जा रहा है। उनके मुताबिक, अगर विपक्ष अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाता तो युवाओं को इस तरह का आंदोलन खड़ा करने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका क्यों नजर नहीं आई।



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