रायपुर

महासमुंद में चक्काजाम,रायपुर जा रहे किसानों को रोका:किसान नेता भी हिरासत में; कावेरी सीड्स पर 4.70 करोड़ बकाया का आरोप, बेलसोंडा में हाईवे जाम — ताजा अपडेट

15 अगस्त विज्ञापन

महासमुंद में कावेरी सीड्स कंपनी से भुगतान न मिलने पर किसान सड़क पर उतर आए। कंपनी के रायपुर स्थित ऑफिस का घेराव करने जा रहे किसानों को पुलिस ने रोक लिया। इससे नाराज किसानों ने बेलसोंडा में NH-353 पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम कर दिया। वे 6.11 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने किसान नेता जागेश्वर जुगनू चंद्राकर और भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही को हिरासत में लेकर खल्लारी पहुंचाया। यह जानकारी मिलते ही कई किसान बेलसोंडा पहुंचे और हाईवे पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल हैं। आंदोलन स्थल पर ही किसानों के भोजन की व्यवस्था की जा रही है। किसानों को 8 महीने से भुगतान का इंतजार है। उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तक गुहार लगाई है। किसानों के अनुसार, पहले भी उन्हें भुगतान के आश्वासन पर रोका गया था, पर पैसे नहीं मिले। 8 महीने से भुगतान का इंतजार, अब सड़क पर उतरे किसान किसानों का कहना है कि वे कई महीनों से बकाया भुगतान के लिए जिला प्रशासन, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। किसान नेताओं के मुताबिक, इससे पहले 20 फरवरी 2026 को भी किसान रायपुर जाने के लिए निकले थे। उस समय बेलसोंडा के पास प्रशासन ने भुगतान कराने का आश्वासन देकर उन्हें रोक दिया था। किसानों का आरोप है कि इसके बाद भी उन्हें पूरी रकम नहीं मिली। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक कंपनी के रायपुर स्थित कार्यालय जाकर अपनी मांग रखना चाहते थे। इसके लिए वे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में खाने-पीने का सामान लेकर निकले थे। उनका आरोप है कि कंपनी से भुगतान कराने के बजाय किसानों को रास्ते में रोक दिया गया। 176 किसानों के 4.62 करोड़ रुपए बकाया होने का दावा किसान नेता जागेश्वर जुगनू चंद्राकर के मुताबिक, कावेरी सीड्स कंपनी ने रबी सीजन 2024-25 में किसानों के खेत लीज पर लेकर बीज उत्पादन कराया था। यह काम कंपनी के छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार रेड्डी के मार्गदर्शन में हुआ था। किसानों का आरोप है कि उपज तैयार होने के बाद भी उन्हें पूरा भुगतान नहीं मिला। भारतीय किसान यूनियन के अनुसार, छत्तीसगढ़ के 7 जिलों के 176 किसानों का कुल 4 करोड़ 62 लाख 29 हजार 866 रुपए बकाया है। इनमें महासमुंद जिले के 85 किसान शामिल हैं। इसके अलावा खेतों में काम करने वाले मजदूरों की 7 लाख 89 हजार 500 रुपए मजदूरी भी बकाया बताई गई है। इस तरह किसानों और मजदूरों की कुल बकाया रकम 4 करोड़ 70 लाख 19 हजार 366 रुपए बताई गई है। किसान यूनियन का दावा है कि जुलाई 2025 से अक्टूबर 2026 तक 15 महीने का 2 प्रतिशत मासिक ब्याज जोड़ने पर बकाया रकम करीब 6 करोड़ 11 लाख 25 हजार 175 रुपए हो जाती है। मुंशियों को भुगतान किया, मजदूरों को क्यों नहीं? भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही ने आरोप लगाया कि कंपनी ने बीज उत्पादन के काम के लिए स्थानीय स्तर पर मासिक वेतन पर मुंशी रखे थे। इनमें से कुछ का छह महीने का भुगतान बाकी था। बाद में कथित समझौते के तहत छह मुंशियों को तीन महीने का भुगतान किया गया। उन्हें कुल 1 लाख 80 हजार रुपए दिए गए। विद्रोही ने सवाल उठाया कि जब मुंशियों के भुगतान का रास्ता निकाला जा सकता है, तो खेतों में काम करने वाले मजदूरों और किसानों को उनकी रकम क्यों नहीं दी जा रही है। किसानों ने कहा- भुगतान होने तक जारी रहेगा आंदोलन तेजराम विद्रोही ने कहा कि किसान और मजदूर लंबे समय से भुगतान की मांग कर रहे हैं। जब उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उन्हें आंदोलन करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी से भुगतान कराने के बजाय आंदोलन कर रहे किसानों को हिरासत में लिया गया। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्वक अपनी मांग रखने रायपुर जा रहे थे। उन्होंने साफ किया कि जब तक बकाया भुगतान को लेकर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक चक्काजाम जारी रहेगा। फिलहाल बेलसोंडा में नेशनल हाईवे-353 पर किसानों का धरना जारी है। चक्काजाम के कारण सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ है और मौके पर पुलिस बल तैनात है।

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