छत्तीसगढ़

कुंजारा–तोलगे सड़क पर सियासी संग्राम, मरम्मत कार्य को लेकर ग्रामीणों का विरोध, भाजपा नेताओं और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस

15 अगस्त विज्ञापन

(गौरी शंकर गुप्ता) लैलूंगा, रायगढ़। वर्षों से बदहाल पड़ी कुंजारा से तोलगे पहुंच मार्ग एक बार फिर राजनीतिक और जनआंदोलन का केंद्र बन गया है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्र में आंदोलन चला रहे रवि भगत के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सोमवार को उस समय जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जब लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम जेसीबी मशीन के साथ सड़क पर मरम्मत कार्य शुरू करने पहुंची।

मौके पर माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज सतपथी, जनपद उपाध्यक्ष मनोज अग्रवाल सहित भाजपा के कई नेता एवं कार्यकर्ता भी मौजूद थे। नेताओं की मौजूदगी से ग्रामीणों में यह चर्चा तेज हो गई कि यहां सड़क मरम्मत के लिए भूमि पूजन किया जाने वाला है।

*ग्रामीणों ने नेताओं को घेरा, पूछे तीखे सवाल*

केशला गांव के बड़ी संख्या में पहुंचे युवक, बुजुर्ग और महिलाओं ने भाजपा नेताओं से सीधा सवाल किया कि आखिर सड़क पर कौन-सा कार्य होने जा रहा है, कितनी दूरी तक होगा और किस मद से कराया जाएगा। सवालों की बौछार के बीच कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया और मौके पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।इसी दौरान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रवि भगत भी मौके पर पहुंचे और सीधे पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर से कार्य की प्रकृति और स्वीकृत राशि के संबंध में जानकारी मांगी।

*PWD इंजीनियर ने क्या कहा?*

पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जो कार्य शुरू किया जा रहा है, वह विभाग का रूटीन मेंटेनेंस कार्य है। सड़क पर जहां पानी भर गया है और कटाव हो गया है, वहां जेसीबी से सफाई कर गिट्टी और सीमेंट चूरा डालकर अस्थायी मरम्मत की जाएगी।

जब उनसे पूछा गया कि क्या यही वह कार्य है जिसके लिए बड़ी राशि स्वीकृत हुई है, तो उन्होंने बताया कि करीब 20 लाख रुपये की राशि लगभग 9 किलोमीटर सड़क की मरम्मत के लिए स्वीकृत हुई है, जिसकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि उस राशि से होने वाला कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।

इंजीनियर ने यह भी कहा कि फिलहाल चल रहा कार्य स्वीकृत 20 लाख रुपये की योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि विभाग की नियमित व्यवस्था के तहत किया जा रहा अस्थायी मरम्मत कार्य है।

सबसे महत्वपूर्ण बात तब सामने आई जब इंजीनियर से भाजपा नेताओं की मौजूदगी और कथित भूमि पूजन के बारे में पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वे केवल विभागीय कार्य कराने पहुंचे थे। भाजपा नेता किस उद्देश्य से आए थे और उन्हें किसने बुलाया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

*आंदोलनकारियों का आरोप*

इंजीनियर का बयान सामने आने के बाद आंदोलनकारी और ग्रामीण अधिक मुखर हो गए। उनका आरोप था कि वर्षों से उपेक्षित सड़क को लेकर जब क्षेत्र के लोग आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं, तब भाजपा नेता जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से मौके पर पहुंचे।

रवि भगत और उनके समर्थकों ने कहा कि यदि सड़क के निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया पहले से चल रही थी तो इतने वर्षों तक क्षेत्र की जनता को बदहाल सड़क पर चलने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ा। उनका कहना था कि अब जब आंदोलन तेज हो रहा है, तब राजनीतिक सक्रियता दिखाई जा रही है।

*भाजपा नेताओं ने आरोपों से किया इनकार*

वहीं भाजपा नेताओं ने आंदोलनकारियों के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार का भूमि पूजन करने नहीं पहुंचे थे।

भाजपा नेताओं के अनुसार उनका पहले से निर्धारित जनसंपर्क अभियान था, जिसके तहत वे क्षेत्र के लोगों से मिलने पहुंचे थे। सड़क की स्थिति को लेकर भी ग्रामीणों से चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि कुंजारा से हिंझर पुलिया तक सड़क निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, एस्टीमेट तैयार हो चुका है तथा टेंडर प्रक्रिया जारी है। बारिश के कारण फिलहाल स्थायी निर्माण संभव नहीं है, इसलिए अस्थायी मरम्मत कराई जा रही है। मौसम अनुकूल होने पर नियमानुसार सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

*अब सवाल जनता के बीच*

घटनास्थल पर सामने आए दोनों पक्षों के बयानों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर आंदोलनकारी इसे वर्षों की उपेक्षा और जनता को गुमराह करने का प्रयास बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता इसे पूर्व निर्धारित जनसंपर्क कार्यक्रम और विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं।

फिलहाल इतना तय है कि कुंजारा–तोलगे सड़क अब केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्षों से सड़क की मांग कर रहे लोगों को स्थायी समाधान कब तक मिलता है और प्रशासन इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है।

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