क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर डराया: कोरबा में साइबर सेल की मुस्तैदी से बची चिकित्सक की जमा-पूंजी

कोरबा में साइबर ठगों ने आयुर्वेद चिकित्सक को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 40 लाख रुपये ठगने की कोशिश की। चिकित्सक ने सजगता दिखाते हुए साइबर सेल को सूचना द…और पढ़ें
HighLights
- ठगों ने घर से बाहर निकलने पर जेल भेजने की झूठी धमकी देकर मानसिक दबाव बनाया।
- बैंक खाते से राशि ट्रांसफर होने से पहले साइबर सेल की मदद से खाते को सुरक्षित किया गया।
- किसी भी अज्ञात वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और घबराएं नहीं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: साइबर ठगों ने क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर जिले के एक आयुर्वेद चिकित्सक को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और 40 लाख रुपये आरटीजीएस से ट्रांसफर कराने का दबाव बनाया। चिकित्सक की सतर्कता और साइबर सेल की त्वरित कार्रवाई से उनकी जीवनभर की जमा पूंजी सुरक्षित बच गई।
10 जुलाई की दोपहर करीब तीन बजे आयुर्वेद चिकित्सक गौतम प्रसाद नेताम के पास एक महिला का फोन आया। महिला ने दावा किया कि उनके आधार नंबर से दो सिम जारी हैं। दूसरे सिम का इस्तेमाल अश्लील संदेश और वीडियो भेजने में किया गया है। इसके चलते उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही गई। इसके बाद उनकी बात खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से कराई गई।
वीडियो काल पर कथित अधिकारी ने मनी लांड्रिंग प्रकरण में गिरफ्तार व्यक्ति की तस्वीर दिखाकर चिकित्सक को डराया। इसके बाद उन्हें और उनकी पत्नी को घर से बाहर नहीं निकलने तथा किसी से बात नहीं करने के निर्देश दिए गए। तीन दिनों तक लगातार जेल भेजने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाया गया। इस दौरान उनकी पत्नी, जो सेवानिवृत्त प्राचार्य हैं, तनाव के कारण अस्वस्थ हो गईं। इसके बाद ठगों ने बैंक खाते की पूरी जानकारी लेकर जमा राशि निकालने को कहा।
नकद राशि लाने से इन्कार करने पर 40 लाख रुपये आरटीजीएस से ट्रांसफर करने का दबाव बनाया गया। इसी बीच चिकित्सक को ठगी की आशंका हुई। उन्होंने अपने मित्र अजित आनंद को पूरी बात बताई। मित्र की सलाह पर वह तत्काल साइबर सेल पहुंचे और साइबर प्रभारी ललित चंद्रा को शिकायत दी।]
शिकायत मिलते ही साइबर सेल ने बैंक से संपर्क कर खाते को सुरक्षित कराया और संदिग्ध नंबर ब्लाक करने की सलाह दी। समय रहते शिकायत होने से ठगी की कोशिश नाकाम हो गई। प्रारंभिक जांच में आरोपितों द्वारा इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर फर्जी पाया गया है।
ऐसे देते हैं डिजिटल अरेस्ट का झांसा
साइबर ठग खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच, सीबीआइ या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो काल करते हैं। आधार, सिम कार्ड, पार्सल या मनी लांड्रिंग के नाम पर कार्रवाई का डर दिखाया जाता है। इसके बाद पीड़ित को किसी से बात नहीं करने और घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत देकर मानसिक दबाव बनाया जाता है। फिर बैंक खाते की जानकारी लेकर रकम ट्रांसफर कराने का प्रयास किया जाता है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो काल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती। ऐसी काल आने पर घबराएं नहीं और किसी प्रकार की बैंक संबंधी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। संदेह होने पर तुरंत साइबर सेल या निकटतम थाना से संपर्क करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।




