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केंद्रीय मंत्री पाटिल,CM साय ने की जल संरक्षण की समीक्षा: भूजल संवर्धन को जनआंदोलन बनाने पर जोर, कार्ययोजना पर चर्चा – Mungeli News

15 अगस्त विज्ञापन




मुंगेली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक का उद्देश्य जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को जनआंदोलन का रूप देना रहा। इस दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में संचालित जल संरक्षण गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जल संचयन के लिए संसाधनों के बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया। ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। भूजल संवर्धन के लिए गैब्रियन स्ट्रक्चर, सोखता गड्ढा, चेक डैम, तालाब गहरीकरण और रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसी गतिविधियों को बड़े स्तर पर संचालित करने की बात कही गई। नगरीय क्षेत्रों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को बढ़ावा देने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। सीएम ने जल संकट को बताया सामाजिक-आर्थिक चुनौती मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “जल है तो जीवन है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संकट अब केवल पर्यावरणीय विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल संचयन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अधिकारियों को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्य करने के निर्देश दिए गए। केंद्रीय मंत्री ने जनभागीदारी पर दिया जोर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि सरकारी योजनाओं के साथ जनभागीदारी जोड़कर जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं है। आवश्यकता मजबूत कार्ययोजना तैयार कर तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने की है। बैठक में जीआईएस मैपिंग के माध्यम से जल स्रोतों की पहचान और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। जिला स्तर पर योजनाओं की समीक्षा इसी क्रम में कलेक्टर कुन्दन कुमार ने जिला कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी कक्ष में जल संरक्षण योजनाओं की समीक्षा की। संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। पीएचई विभाग को संभावित जल संकट से पहले आवश्यक स्थानों पर टंकियां स्थापित करने के निर्देश मिले। पंचायत विभाग को शौचालय निगरानी और जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया।

मुंगेली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को जनआंदोलन का रूप देना था।इसमें छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में चल रही जल संरक्षण गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में जल संचयन के लिए संसाधनों के समन्वय पर जोर दिया गया और ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। भूजल संवर्धन के लिए गैब्रियन स्ट्रक्चर, सोखता गड्ढा, चेक डैम, तालाब गहरीकरण और रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसी गतिविधियों को बड़े पैमाने पर संचालित करने पर बल दिया गया।नगरीय क्षेत्रों में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को बढ़ावा देने और पानी की बर्बादी को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए गए।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जल है तो जीवन है।”उन्होंने बताया कि जल संकट अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि एक आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जल संचयन के क्षेत्र में अच्छा काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्य करने के निर्देश दिए।केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि सरकारी योजनाओं और जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं है,बल्कि आवश्यकता एक मजबूत कार्ययोजना बनाकर समय-सीमा में कार्यों को पूरा करने की है। बैठक में जीआईएस मैपिंग के जरिए जल स्रोतों की पहचान और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। इसी क्रम में,कलेक्टर कुन्दन कुमार ने जिला कलेक्टोरेट स्थित एनआईसी कक्ष में जिले में जल संरक्षण की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।उन्होंने संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। पीएचई विभाग को जल संकट की स्थिति बनने से पहले आवश्यक स्थानों पर टंकियां स्थापित करने के निर्देश दिए गए,जबकि पंचायत विभाग को शौचालय निगरानी और जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया।



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