
गौरीशंकर गुप्ता /रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में जनसंपर्क विभाग की एक महिला अधिकारी की कार्यशैली ने ‘सुशासन’ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक कर्मचारी की व्यथा से शुरू हुआ यह मामला अब स्वतंत्र पत्रकारिता बनाम अफसरशाही के अहंकार की राष्ट्रीय बहस बन चुका है।
शोषण की पराकाष्ठा :
सफाईकर्मी से ‘गुलामी’ कराने का आरोप -विवाद की जड़ जिला जनसंपर्क कार्यालय जशपुर में कार्यरत एक अंशकालीन सफाईकर्मी रविन्द्रनाथ राम की प्रताड़ना है :
काम का बोझ :
2012 से मात्र 4,600 रुपये के वेतन पर कार्यरत इस कर्मचारी से सफाई के अलावा फोटोग्राफी, कंप्यूटर संचालन, ड्राइविंग और डाक वितरण जैसे काम कराए जा रहे थे।
* निजी कार्य : आरोप है कि अधिकारी नूतन सिदार उससे अपने घर पर झाड़ू-पोछा, बर्तन मंजवाना और बिजली के निजी काम भी करवाती थीं।
* धमकियां : विरोध करने पर कर्मचारी को नौकरी से निकालने और SC/ST एक्ट में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी जाती थी।
* आत्महत्या का प्रयास : इस प्रताड़ना से तंग आकर रविन्द्रनाथ ने 13 अगस्त 2025 को कीटनाशक पीकर आत्महत्या का प्रयास किया।
पत्रकारिता पर हमला :
अधिकारी जब खुद बन गई ‘जज’ :स्वतंत्र पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने जब इस शोषण और विभाग में हो रहे कथित भ्रष्टाचार (फर्जी कंप्यूटर ऑपरेटर के नाम पर वेतन आहरण) को उजागर किया, तो अधिकारी बौखला गईं :
* लिखित में ‘अपराधी’ घोषित : 2 सितंबर 2025 को पुलिस को दिए आवेदन में नूतन सिदार ने पत्रकार को बिना किसी अदालती आदेश के दो बार “अपराधी” (Criminal) लिखकर संबोधित किया।
* साइबर मानहानि : अधिकारी ने इस अपमानजनक पत्र को कलेक्टर के ऑफिशियल व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल कर दिया, जिससे पत्रकार की सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हुई।
‘VIP डाक सेवा’ और 1 करोड़ का नोटिस :
* रात में खुला डाकघर : अधिकारी की शिकायत भेजने के लिए रायगढ़ डाकघर को रात 8:25 बजे (20:25) विशेष रूप से खुलवाया गया, जो आम जनता के लिए 5 बजे बंद हो जाता है।
* विधिक आतंक : पत्रकार को चुप कराने के लिए 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया। इसके जवाब में पत्रकार ने भी अधिकारी को लीगल नोटिस भेजकर 50 लाख रुपये हर्जाने और माफी की मांग की है।
PMO तक पहुंची गूंज: सुशासन की अग्निपरीक्षा :
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की संदिग्ध चुप्पी (RTI में जानकारी छिपाने के आरोप) के बाद मामला दिल्ली पहुंच गया है:
* शिकायत ‘Under Process’ : ऋषिकेश मिश्रा ने 6 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत दर्ज कराई।
* पंजीकरण संख्या : पीएमओ ने शिकायत (PMOPG/D/2025/0229404) को स्वीकार कर लिया है और यह वर्तमान में कार्यवाही हेतु प्रोसेस में है।
* मांग :अधिकारी पर FIR दर्ज करने और सिविल सेवा आचरण नियम के उल्लंघन पर उन्हें बर्खास्त करने की मांग की गई है।
यह मामला अब अभिव्यक्ति की आजादी बनाम अफसरशाही के अहंकार की लड़ाई बन चुका है। अब पूरे प्रदेश की नजरें इस पर हैं कि क्या मुख्यमंत्री अपने गृह जिले में हो रहे इस ‘लोकतंत्र के चीरहरण’ पर ठोस कार्रवाई करेंगे?…




