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इस छत्तीसगढ़ी फिल्म में भाई-बहन बने हीरो-हीरोइन, ऐसा देश का पहला मामला

15 अगस्त विज्ञापन


क्या कहते हैं पैरेंट्स पिता बालकृष्ण चौहान और मां लच्छन बाई ने कहा, हमारे बच्चों ने अब तक 200 वीडियो एल्बम किए हैं। बच्चों के साथ ही हमरा भी सपना था कि उन्हें बड़े पर्दे पर देखें। इन्होंने जितने भी वीडियो एल्बम बनाए हैं सभी रोमांटिक ही हैं। उस वक्त तो किसी ने कुछ नहीं कहा, फिल्म में आने पर बेवजह की कंट्रोवर्सी क्रिएट की जा रही है।

हर किसी की अपनी सोच करण और किरण बचपन से वीडियो एल्बम बना रहे हैं। अब तक इनके 200 से ज्यादा वीडियो एल्बम रिलीज हो चुके हैं, जिसे लगभग 1000 मिलियन व्यू मिल चुके हैं। इनकी बहुत इच्छा थी कि फिल्म करें। हमने इनके माता-पिता से चर्चा की और फिल्म बनाई। रही बात कंट्रोवर्सी की तो सबकी अपनी सोच होती है, हम किसी को कुछ नहीं बोल सकते। हमारा मकसद नहीं कि समाज में किसी प्रकार की कुरिति फैलाने की। हमने इंटरटेनमेंट के लिए फिल्म बनाई है।
संतोष कुर्रे, प्रोड्यूसर

अभिनय और वास्तविकता दोनों अलग मामले पर काया प्रवेश के कारण अभिनय को पंचम वेद माना गया है। पर्दे पर राम या रावण बना व्यक्ति निजी जीवन में क्या है, यह उसका निजी मामला है। हमें तो बस पर्दे वाली छवि तक ही खुद को सीमित रखना चाहिए। मदर इंडिया में सुनील दत्त की मां का रोल करने वाली नर्गिस वास्तविक जीवन में पति-पत्नी बने। फिल्म में जो दिखाया जाता है, उसकी तुलना वास्तविक जीवन के रिश्तों से जोडऩा सही नहीं है।

संतोष जैन, चेयरमैन सीसीटीपीए



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