छत्तीसगढ़

घरघोड़ा न्यायालय ने दिया गढ़ गोलीकांड मामले में सगे भाई बहन को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

15 अगस्त विज्ञापन

(गौरी शंकर गुप्ता) न्यायालय श्रीमान अभिषेक शर्मा अपरसत्र न्यायाधीश घर घोड़ा ने अभियुक्त गोपाल यादव एवं अभियुक्ता लक्ष्मी यादव को मृतका दुरपती यादव की गोली मारकर हत्या करने के अपराध में दोषी ठहराते हुए दोनों भाई बहन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा अर्थ दंड से दंडित किया।

मामले को संक्षिप्त विवरण बताते हुए अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने बताया कि थाना लै लूंगा अंतर्गत ग्राम दियागढ़ के हरिराम यादव ने थाना लै लूंगा में रात्रि लगभग 2=20 बजे फोन कर सूचना दिया कि उनके गांव में गोली चली है सूचना पाकर तत्कालीन थाना प्रभारी आर एस तिवारी दलबल सहित ग्राम दियागढ़ जाकर घटना के संबंध में जानकारी लिए तब सूचना कर्ता हरिराम यादव ने बताया कि वह घटना की दरमियानी रात को 9:00 बजे परिवार सहित अपने इंदिरा आवास स्थित मकान में सोया था, तथा उसकी मां घर के बाहर गली खोल में खाट बिछाकर सोई थी रात्रि लगभग 2:00 बजे उनका पालतू कुत्ता बहुत जोर-जोर से भौंकने लगा तब वह उठकर देखा तभी उसका भाई दशरथ भी साथ-साथ उठा और दोनों दरवाजा खोल रहे थे उसी समय बाहर गोली चलने की आवाज आई और दोनों हड़बड़ा कर बाहर निकल कर देखें ,तो अभियुक्त गोपाल यादव एवं विधि के साथ संघर्षरत बालक उनकी माता दुरपती यादव को सीने में गोली मार कर हत्या कर मोटरसाइकिल से भाग रहे थे गोली की आवाज सुन एवं हल्ला गुल्ला सुन कर गांव के लोग वहां इकट्ठा हो गए और थाने में सूचना दिया था।

उक्त सूचना के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी आर एस तिवारी ने अपने आला अधिकारी को घटना की सूचना दी तथा मामले के सभी पहलुओं पर बारीकी से जांच करने पर पता चला कि अभियुक्त गण एवं सूचना कर्ता हरिराम के परिवार के मध्य पुरानी रंजिश के कारण दुश्मनी चली आ रही थी सूचना कर्ता हरिराम ने बताया कि अभियुक्त गोपाल यादव की चचेरी बहन पदमा के साथ उसने प्रेम विवाह किया था तभी से अभियुक्त के परिवार और उनके परिवार के मध्य अक्सर लड़ाई झगड़ा होते रहता था इसी मध्य विधि के साथ संघर्षरत बालक के पिता की हत्या हो गई थी जिसमें हरिराम के विरुद्ध मामला चला था तथा उक्त मामले से हरी राम छूट कर आया था। तभी से विधि के साथ संघर्षरत बालक उससे दुश्मनी रखता था इसी विषय को लेकर परिवार के महिलाओं के मध्य भी आपसी तालमेल ठीक नहीं था अभियुक्त लक्ष्मी यादव और मृतिका दुरपति यादव के बीच अक्सर वाद विवाद होता था। अभियुक्ता लक्ष्मी यादव उसे जान से मारने की धमकी देते रहती थी प्रकरण को विवेचना के दौरान विवेचना अधिकारी के द्वारा विधि के साथ संघर्षरत बालक को अभ्युक्ता लक्ष्मी यादव के निवास से गिरफ्तार किया गया तथा अभियुक्त एवं विधि के साथ संघर्षरत बालक के द्वारा अपराध कबूल करते हुए यह बतलाया गया कि अभियुक्त गोपाल यादव अभियुक्त लक्ष्मी यादव एवं विधि के साथ संघर्षरत बालक ने योजना बनाकर मृतिका की हत्या को अंजाम दिया था। तथा हत्या में प्रयुक्त भरमार बंदूक को अभियुक्ता लक्ष्मी यादव तोड़कर रख दी थी विवेचना अधिकारी ने अभियुक्ता लक्ष्मी यादव के गेरवानी स्थित मकान से टूटा हुआ भरमार बंदूक एवं विधि के साथ संघर्षरत बालक से एक नग रिवाल्वर जप्त किया था ।तथा अभियुक्ता के उड़ीसा स्थित मकान से अभियुक्त गोपाल यादव को गिरफ्तार किया था।

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