Uncategorized

चक्रवात ‘अर्नब’ का खतरा: छत्तीसगढ़ के कई जिलों में रेड अलर्ट, भारी बारिश की चेतावनी

15 अगस्त विज्ञापन

पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में उठा भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से टकराने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस भयंकर चक्रवात का सीधा और व्यापक असर पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। समुद्र की तरफ से आ रही ठंडी और नम हवाओं ने प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट दर्ज कराई है, जिससे दिन में भी ठंडक का अहसास होने लगा है और मौसम में बड़ा बदलाव आया है।

मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, यह चक्रवाती तूफान 125 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट को पार करेगा। इसके प्रभाव से 28 और 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दक्षिणी तथा मध्य हिस्सों में भारी से अतिभारी बारिश होने की प्रबल संभावना है, जिसकी मात्रा 115.5 से 204.5 मिलीमीटर तक हो सकती है। विशेषकर बस्तर संभाग के लिए 204 मिलीमीटर से अधिक की सीमांत वर्षा और लगभग 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जिससे इस क्षेत्र में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

चक्रवात के आसन्न खतरे को देखते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सभी प्रमुख जिलों—बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर में प्रशासन को पूरी तरह हाई अलर्ट पर रखा गया है। इंद्रावती, मारकंडी और नारंगी जैसी नदियों के तटीय गांवों तथा निचले इलाकों में विशेष मुनादी कराकर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। 18 से अधिक भवनों को सुरक्षित राहत शिविरों में बदला गया है, जहां प्रभावितों के लिए भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर 24 घंटे सक्रिय रहने वाला बाढ़ नियंत्रण कक्ष भी शुरू किया गया है, जिसका हेल्पलाइन नंबर 07782-223122 है। किसी भी आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) तथा होमगार्ड की विशेष टीमों को भी तैनात कर दिया गया है।

चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव के कारण रेलवे सेवाओं पर भी असर पड़ा है। बस्तर से गुजरने वाली पांच ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है, जबकि दो अन्य ट्रेनों के रूट में बदलाव किया गया है। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा और संभावित व्यवधानों को देखते हुए उठाया गया है, जिससे यात्रा करने वाले लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग ने 28 अक्टूबर के लिए बस्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के लिए विशेष अलर्ट जारी किए थे। बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और कोंडागांव जिलों में भारी से अतिभारी बारिश के लिए रेड अलर्ट घोषित किया गया था। इसके अलावा, रायपुर, दुर्ग, धमतरी और महासमुंद सहित कुल 15 जिलों में ऑरेंज अलर्ट तथा सरगुजा संभाग के जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया था, जिसमें तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई थी।

वहीं, 29 अक्टूबर के लिए उत्तरी छत्तीसगढ़ के जिलों में चक्रवात के आगे बढ़ने के साथ ही भारी तबाही की आशंका को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है। इसके अतिरिक्त, कई अन्य जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट के साथ तेज आंधी-तूफान की चेतावनी भी जारी की गई है, जिससे इन क्षेत्रों में भी सतर्कता बनाए रखने की अपील की गई है।

इस चक्रवाती तूफान के प्रभाव के बीच धमतरी और जगदलपुर में आसमान का एक दुर्लभ और अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां सूर्यास्त के समय बादल गहरे लाल रंग के दिखाई दिए। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, जब बारिश नहीं होती लेकिन आसमान में घने बादल छाए रहते हैं, तब प्रकाश के प्रकीर्णन (VIBGYOR सिद्धांत) के कारण सूर्यास्त के वक्त किरणें अधिक दूरी तय करती हैं, जिससे ऐसी लाल और नारंगी रंग की दुर्लभ खगोलीय छटा दिखाई देती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्राकृतिक घटना को सीधे तौर पर तूफान का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!