गरियाबंद में 6 साल से अधूरा पुल, बच्चे 20 फीट सीढ़ी चढ़कर जाते हैं स्कूल; NHRC ने मांगी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अधूरे पुल से स्कूली बच्चों के नदी पार करने के मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे बच्चों की सुरक्षा और मानवाधिकार से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी है।
मामला मैनपुर ब्लॉक के ग्राम खामभाठा का है। पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा और खामभाठा गांव के बीच पैरी नदी बहती है। खामभाठा समेत तीन से ज्यादा गांवों के लोगों की सुविधा के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने साल 2021 में पैरी नदी पर 90 मीटर पुलिया निर्माण के लिए 5 करोड़ 66 लाख रुपए की मंजूरी दी थी। साल 2023 में पुल निर्माण को तकनीकी स्वीकृति मिली थी और इसे साल 2025 तक पूरा किया जाना था, लेकिन पिछले साल से पुल अधूरा पड़ा है।
ग्रामीणों ने बताया कि 30 से ज्यादा स्कूली बच्चों को देहारगुड़ा स्कूल पहुंचने के लिए अधूरे पुल से होकर गुजरना पड़ता है। उनको भी रोजाना पंचायत मुख्यालय और ब्लॉक मुख्यालय आने-जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। बारिश के दौरान पैरी नदी का बहाव तेज होने पर परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों को करीब 20 फीट की सीढ़ी चढ़कर अधूरे पुल पर पहुंचना पड़ता है। इसके बाद पुल पर बिछाई गई सेंटरिंग प्लेट और प्लाई के सहारे जोखिम उठाकर नदी पार करनी पड़ती है।
अधूरे पुल पर स्लैब जोड़ने के लिए सेंटरिंग प्लेट और प्लाई बिछाई गई है। दोनों ओर गहरी खाई है और पुल से निकले सरिए हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं। छोटे बच्चों को उनके पेरेंट्स नदी और पुल पार कराने के लिए साथ पहुंचते हैं। मिडिल स्कूल के प्रिसिंपल चित्रसेन पटेल ने बताया कि छुट्टी के समय स्कूल प्रबंधन की ओर से सहयोगियों की एक टोली बच्चों को सुरक्षित पुल पार कराने के लिए तैनात रहती है।
स्कूली बच्चों के अलावा ग्रामीणों को भी पूरी बरसात इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। खामभाठा गांव में दुपहिया और चार पहिया वाहन रखने वाले ग्रामीणों को अपने वाहन पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा में छोड़ने पड़ते हैं।
पुल निर्माण का ठेका लोक निर्माण विभाग की सेतु शाखा ने बिलासपुर की कंपनी मेसर्स नटराज इंफ्रा बिल्डकॉन को दिया था। विभाग अब तक ठेका कंपनी को करीब 70 फीसदी राशि का भुगतान कर चुका है। विभाग का दावा है कि निर्माण में देरी को देखते हुए कंपनी पर दो बार पेनाल्टी लगाई गई है और उसे काम पूरा करने के लिए एक्सटेंशन दिया गया है।
कांग्रेस के जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि आखिर एक्सटेंशन के मुताबिक पुल का काम जून 2026 तक पूरा होना था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण अधूरा पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग कंपनी की लापरवाही पर पर्दा डालने में लगा है।
सेतु शाखा के इंजीनियर फागूलाल रात्रे ने बताया कि पुल का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अभी केवल एप्रोच का काम बाकी है। बारिश खत्म होने के बाद जल्द ही बाकी काम पूरा कराया जाएगा।
इस बीच, मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अफसरों ने इलाके का दौरा किया। इसके बाद सेतु शाखा के अफसरों ने लोहे की छड़ वाली सीढ़ी हटाकर सेंटरिंग प्लेट से सीढ़ी बनवा दी। हालांकि, इससे बच्चों के लिए नदी पार करने की मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।




