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DRG-दंपती के घर समेत 55 मकानों पर चला बुलडोजर: कड़कड़ाती ठंड में टेंट में गुजारी रात, बीजापुर में लोग बोले-गांव जाएंगे तो नक्सली मार डालेंगे – Chhattisgarh News

15 अगस्त विज्ञापन




छत्तीसगढ़ के बीजापुर में न्यू बस स्टैंड के पीछे स्थित चट्टानपारा इलाके में आज अवैध अतिक्रमण बताते हुए प्रशासन ने 55 मकानों पर बुलडोजर चलाया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में रहने वाले 55 परिवार बेघर हो गए हैं। पीड़ित परिवारों ने कड़कड़ाती ठंड में पॉलिथीन के टेंट के सहारे रात गुजारी। इस दौरान डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) दंपती का घर भी तोड़ा गया, जबकि जवान ड्यूटी पर गया हुआ था। घर में मौजूद उसकी पत्नी के मुताबिक, वे यहां 2006 से रह रहे हैं, और गांव में उनके पास कोई घर नहीं है। कार्रवाई के दौरान कई महिलाओं की रोती हुई तस्वीरें भी सामने आई हैं। महिलाएं सवाल कर रही थीं- हम कहां जाएंगे? ये तस्वीरें देखिए- नक्सली हिंसा के कारण गांव छोड़कर आए थे पीड़ित गंगा माड़वी का कहना है कि वे अपने परिवार के साथ पिछले 4 सालों से यहां रह रहे हैं। नक्सली हिंसा के कारण वे अपने गांव को छोड़कर यहां आए थे। प्रशासन से बातचीत के बाद उन्होंने घर बनाया और नियमित रूप से टैक्स भी जमा कर रहे थे। अब प्रशासन घरों को तोड़ रहा है। गांव वापस गए तो नक्सली मार देंगे। गंगा के मुताबिक तीन महीने पहले उन्हें मकान खाली करने का नोटिस मिला था, जिस पर मामला कोर्ट में चल रहा है। उन्हें यह भरोसा भी दिलाया गया था कि घर नहीं तोड़ा जाएगा, लेकिन अब अचानक मकानों को गिराया जा रहा है। बच्ची बोली- स्कूल नहीं जा पाए, हमारा घर तोड़ दिया अतिक्रमण के कार्रवाई के दौरान टूटे हुए घर के बाहर रखे सामान से किताबें देखती हुई बच्ची की तस्वीर भी सामने आई। रिपोर्टर के सवाल पूछने पर बच्ची कह रही है। सुबह स्कूल नहीं जा पाए, हमारा घर तोड़ दिया गया। घर पर खाना बना था लेकिन खाना भी नहीं खा पाए। 20 मकान और तोड़े जाएंगे- सीएमओ कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए नगर पालिका परिषद बीजापुर के सीएमओ बीएल नुरेटी ने बताया कि 55 मकान न्यू बस स्टैंड के पीछे है। सभी को तोड़े जाएंगे। 20 मकान शांति नगर में है। जहां इसके बाद कार्रवाई होगी। ना पीने की और ना खाने की व्यवस्था दैनिक भास्कर की टीम ने रात में मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से बातचीत की। जो परिवार कल तक अपने पक्के मकानों में बेफिक्री से सो रहे थे, वे आज उसी उजड़े हुए आशियाने के पास पॉलीथिन ढककर ठंड में रात बिताने को मजबूर हैं। कार्रवाई के दौरान और उसके बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए न तो पीने के पानी की व्यवस्था की गई और न ही भोजन उपलब्ध कराया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।



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