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धरमजयगढ़ में पति-पत्नी को टांगी से काटा, हादसा दिखाने के लिए शवों पर डाला सोफा कवर और लगा दी आग

15 अगस्त विज्ञापन


दरअसल थाना धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम क्रोंधा निवासी मंगल राठिया (65 वर्ष) एवं उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया (55 वर्ष) के घर के भीतर दोनों के जले हुए शव मिलने की सूचना पुलिस को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी, थाना प्रभारी धरमजयगढ़ निरीक्षक राजेश जांगड़े, थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव, एफएसएल टीम, डाग स्क्वॉड तथा थाना धरमजयगढ़, कापू एवं रैरूमाखुर्द का पुलिस बल तत्काल घटनास्थल पहुंचे।

घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण कर साक्ष्य एकत्र किए गए तथा दोनों शवों का पंचनामा एवं पोस्टमार्टम कराया गया। मृतक के यहां कार्य करने वाले रामलाल चौहान (35 वर्ष) निवासी क्रोंधा बौधपारा ने बताया कि वह पिछले लगभग तीन वर्षों से मृतक मंगल राठिया के घर में कार्य कर रहा है। 14 जुलाई 2026 को वह प्रतिदिन की तरह काम कर शाम को अपने घर चला गया था।

हादसा दिखाने के लिए शवों पर डाला सोफा कवर और लगा दी आग, नौकर ने देखा धुआं

उस समय घर में केवल मंगल राठिया और उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया मौजूद थे। दूसरे दिन सुबह लगभग 6 बजे जब वह काम पर पहुंचा तो घर का मुख्य दरवाजा खुला मिला। अंदर जाने पर घर के सभी दरवाजे खुले थे तथा एक कमरे से धुआं निकल रहा था। कमरे के बाहर से देखने पर उसने मंगल राठिया का शव जली हुई अवस्था में जमीन पर पड़ा देखा तथा उसके पास ही उनकी पत्नी पुनाई बाई राठिया का भी जला हुआ शव पड़ा था। इसके बाद उसने मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दिया था।

घटनास्थल पर मिले हत्या में प्रयुक्त टांगी की गंध लेकर पुलिस डाग रूबी ने श्याम लाल राठिया तक पहुंचने का संकेत दिया। वहीं गवाहों से पूछताछ में मृतक एवं श्याम लाल राठिया के परिवार के बीच पूर्व से भूमि विवाद होने की जानकारी मिली। पुलिस डाग के संकेत, एफएसएल साक्ष्यों, ह्यूमन इंटेलिजेंस तथा वैज्ञानिक पूछताछ के आधार पर संदेही श्याम लाल राठिया उम्र 32 साल एवं उसके भाई जीवन लाल राठिया उम्र 48 साल से अलग-अलग पूछताछ की गई, जिसमें दोनों ने हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया।

जहां दोनो भाइयो को थाना धरमजयगढ़ पुलिस ने धारा 103(1), 238(बी), 326(जी) भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

इस अंधे हत्या प्रकरण के सफल खुलासे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी एवं एसडीओपी धरमजयगढ सिद्धांत तिवारी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी धरमजयगढ़ निरीक्षक राजेश जांगड़े, थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू, प्रशिक्षु उप निरीक्षक शिवम कोंगरे, एएसआई मंजु मिश्रा, एएसआई गंगाराम भगत, एएसआई राम संजीवनी वर्मा, प्रधान आरक्षक प्रकाश गिरी, आरक्षक मनोज कुमार, विजयानंद राठिया, ललित राठिया, इलियास केरकेट्टा, अलेक्स, महिला आरक्षक ज्योति यादव, एफएसएल टीम तथा पुलिस डॉग रूबी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

2013 से चल रहा था भूमि पर विवाद

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने एक भूमि खरीदी थी, जिसे बाद में अधिक कीमत मिलने पर मूल विक्रेता ने मृतक मंगल राठिया को बेच दिया था। समझौते के तहत आरोपियों को उनकी राशि वापस मिल गई थी, लेकिन मृतक द्वारा उसी भूमि पर मकान बनाकर खेती करने से दोनों भाइयों के मन में लगातार रंजिश बनी रही। इसी रंजिश के चलते दोनों ने 14 जुलाई 2026 की रात टांगी लेकर मृतक के घर में प्रवेश किए थे।

यह भी पढ़ें- सावधान कलयुगी बेटों! मां-बाप को सताया तो गंवाना पड़ेगा आशियाना; छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

दरवाजा खोलते ही बुर्जुग पर हमला,चीखने की आवाज सुनकर पत्नी की भी लिए जान

आरोपितों ने पुलिसिया पूछताछ में बताया कि वे रंजिश में पहले रात को घर आए जहां दरवाजा खटखटाया गया ततपश्चात बुर्जुग। मृतक ने दरवाजा खोला,वही दरवाजा खुलते ही मंगल राठिया पर टांगी से ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी। चीखने-चिल्लाने, शोर सुनकर बाहर आई उनकी पत्नी पुनाई बाई की भी टांगी से हत्या कर दी। इसके बाद दोनों आरोपियों ने शवों पर घर में रखे कपड़े, सोफा कवर एवं अन्य सामान डालकर आग लगा दी तथा दो कमरों में भी आग लगाकर हत्या के साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। घटना में प्रयुक्त टांगी वहीं छोड़कर दोनों मौके से फरार हो गए।

लगातार दूसरे प्रकरण में रूबी को मिली सफलता, पूर्व में भी हो चूकी है सम्मानित

हत्याकांड के प्रकरण में पुलिस विभाग की खोजी डाग रूबी अपने हैंडलर वीरेंद्र अनन्त के साथ विवेचना में कई महत्वपूर्ण उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हाल ही के तीन दिनों में दो हत्याकांड का पर्दाफाश करने में पुलिस डाग रूबी ने क्लू दी है। दंपती हत्या में जब वह गंध लेकर आगे बढ़ी तो सीधे आरोपित कर घर आई जहां आरोपित घर में नही मिले लेकिन घर के पीछे में रक्त रंजित कपड़ा मिला था। इससे हत्या की आशंका आरोपितों पर पुलिस को प्रबल हुई। यहां यह भी बताया जाना लाजमी होगा कि तत्कालीन एसएसपी संतोष सिंह के कार्यकाल में रूबी को काप आफ द मन्थ का अवार्ड भी मिल चुका है। यह देश मे पहला मौका था जब किसी डाग को मिला है।



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