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धरमजयगढ़: बोरो कोयला नेटवर्क पर छापा, जंगल में पोकलेन जब्त, कोयला माफिया का सूचना तंत्र फेल

धरमजयगढ़: बोरो कोयला नेटवर्क पर छापा, जंगल में पोकलेन जब्त, कोयला माफिया का सूचना तंत्र फेल

15 अगस्त विज्ञापन

गौरीशंकर गुप्ता/रायगढ़/धरमजयगढ़ । जिले के धरमजयगढ़ अंतर्गत बोरो क्षेत्र में चल रहे अवैध कोयला खनन के एक बड़े नेटवर्क पर प्रशासन ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। 3 फरवरी 2026 को पुलिस, वन और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने बोरो के घने जंगलों में दबिश देकर एक ‘चेन माउंटेन मशीन’ (पोकलेन) को जब्त किया। इस कार्रवाई ने प्रशासन की सफलता से ज्यादा माफिया की गहरी पैठ और सूचना तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कार्रवाई सोमवार को गोपनीय सूचना के आधार पर शुरू हुई। संयुक्त टीम ने बोरो, संगरा और लालमाटी इलाकों में छापेमारी की। जंगल के नाले किनारे अवैध उत्खनन चल रहा था, जहां मशीन से कोयला निकाला जा रहा था। मौके से 64 टन कोयला भी जब्त हुआ, जिसे पुलिस हिरासत में लिया गया। माफिया रिजर्व फॉरेस्ट के कच्चे रास्तों से कोयला परिवहन कर रहे थे।

टीम ने पोकलेन मशीन को रंगेहाथ पकड़ा, लेकिन माफिया भाग निकले। खनिज निरीक्षक आशीष गढ़पाले के नेतृत्व में यह अभियान चला। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने पहले शिकायत पर गोपनीय आदेश जारी किए थे।

क्षेत्र में कोल माफिया सक्रिय है, जो लोकल सांठगांठ से कारोबार चला रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, एक स्थानीय नेता के संरक्षण में खनन हो रहा था। विभागों में सूचना लीक होने से पहले कई छापे फेल हो चुके। ओवरबर्डन की कम मोटाई वाले क्षेत्रों में आसानी से पोकलेन चला रहे थे। धरमजयगढ़-घरघोड़ा के जंगली इलाके अनएक्सप्लोर्ड कोल भंडारों पर नजर।

यह नया ट्रेंड है, जहां माफिया खुद उत्खनन और भंडारण कर रहे। वन विभाग अब पोकलेन मालिक पर अलग प्रकरण दर्ज करेगा, जिसमें वाहन राजसात की कार्रवाई हो सकती है। खनिज विभाग भी FIR दर्ज करवा रहा।

सफल छापे के बावजूद माफिया को पहले ही सूचना मिलने के संकेत मिले। कई विभागों से सांठगांठ के आरोप लगे। कलेक्टर के सख्त निर्देश के बाद कार्रवाई हुई, वरना पहले प्रयास विफल रहे। स्थानीय निवासियों ने लंबे समय से शिकायतें कीं, लेकिन कार्रवाई में देरी। यह घटना छत्तीसगढ़ के कोयला बेल्ट में माफिया की ताकत उजागर करती है।

रायगढ़ जिला कोयला भंडारों से समृद्ध है, लेकिन अवैध खनन पर्यावरण और राजस्व को नुकसान पहुंचा रहा। धरमजयगढ़ आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां जंगल विध्वंस चिंता का विषय। SECL जैसे वैध खनन के बीच अवैध गतिविधियां बढ़ीं। हाल में अमेरा कोल खदान विवाद भी इसी चेन का हिस्सा। प्रशासन अब नेटवर्क उजागर करने पर जोर।

वन विभाग प्रकरण दर्ज करेगा। खनिज विभाग मशीन जब्ती पर FIR करेगा। पुलिस माफिया गिरोह की तलाश में छापेमारी जारी रखेगी। कलेक्टर ने सतत निगरानी के आदेश दिए। स्थानीय विधायक ने भी मामले को उठाया। यदि सांठगांठ साबित हुई तो बड़े अधिकारी निशाने पर।

अवैध खनन से नाले और जंगल नष्ट हो रहे। मिट्टी कटाव, जल प्रदूषण बढ़ा। वन्यजीवों का आवास खतरे में। विशेषज्ञों ने सैटेलाइट निगरानी की मांग की। वैध खनन शुरू होने तक ऐसे प्रयास जरूरी।

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