छत्तीसगढ़ सरकार की नई पहल: सभी सरकारी कार्यालयों में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य
Chhattisgarh government's new initiative: Aadhaar-based biometric attendance system mandatory in all government offices

घरघोड़ा/छत्तीसगढ़: राज्य सरकार ने सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता, अनुशासन और कार्यकुशलता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्तवपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य के सभी कमिश्नरी और जिला कलेक्टरेट कार्यालयों में उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (Aadhaar Enabled Biometric Attendance System – AEBAS) को अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।
यह पहल कट्टरता से समय पालन सुनिश्चित करने, कर्मचारी उपस्थिति के रिकॉर्ड को डिजिटल और सुरक्षित बनाने, और प्रशासनिक जवाबदेही को सुदृढ़ करने के लिए लागू की गई है। पूर्व में उपस्थिति को पारंपरिक रूप से मेनुअल तरीकों से दर्ज किया जाता था, जिसमें कई बार त्रुटियां, उपस्थिति का दुरुपयोग, और गड़बड़ी की आशंका रहती थी। इस नई व्यवस्था से उन सभी कमियों को दूर करने का मक्सद है। यह कदम छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी और जवाबदेह शासन नीति को परिपूर्ण करता है।
सिस्टम की तकनीकी संरचना
आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के तहत कर्मचारियों की उपस्थिति आधार कार्ड से जुड़े बायोमेट्रिक डिवाइस या मोबाइल बेस्ड फेसियल ऑथेंटिकेशन से दर्ज की जाएगी। यह प्रणाली दो बार उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था रखती है: एक काम पर आने के समय (IN टाइम), और दूसरी कार्यालय छोड़ने के समय (OUT टाइम)।
इसके लिए प्रत्येक सरकारी कार्यालय में बायोमेट्रिक मशीनें और डिजिटल उपकरण लगाए जाएंगे। साथ ही, मोबाइल ऐप के जरिये भी कर्मचारियों को उपस्थिति देने की सुविधा रहेगी, जिससे उनकी सुविधा के साथ साथ छोटे-छोटे और दूरदराज के कार्यालय भी इस प्रणाली से जुड़े रहेंगे।
सरकारी आदेश के तहत 1 दिसंबर 2025 से पहले मंत्रालयों और उच्च स्तरीय कार्यालयों में यह प्रावधान संपूर्ण प्रभाव से लागू किया जाएगा। इसके बाद, जनवरी 2026 से सारे विभाग और जिला कलेक्टरेट कार्यालयों में भी इसे लागू किया जाएगा ताकि प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की उपस्थिति डिजिटल रूप में दर्ज हो सके।
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी संभागायुक्तों, जिला कलेक्टरों, और विभागप्रमुखों को आवश्यक निर्देश जारी कर 28 नवंबर तक बायोमेट्रिक उपकरणों के संचालन और प्रशिक्षण हेतु आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। इस आदेश से सुनिश्चित किया जाता है कि सभी विभाग उपस्थिति प्रणाली को सुचारू रूप से कार्यान्वित करने हेतु तैयार हैं।
यह प्रणाली सरकार के प्रशासनिक सुधारों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इससे न केवल कर्मचारियों के समयपालन और अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। डिजिटल और पारदर्शी उपस्थिति से घपलों की संभावना कम होगी और कार्यालयों में जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
इससे सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के प्रबंधन में भी सुधार होगा, क्योंकि उपस्थिति के प्रमाण के अभाव में वेतन कटौती या भुगतान संबंधी विवाद समाप्त हो जाएंगे। साथ ही, कर्मचारियों की गैर-हाजिरी और छुट्टियों पर निगरानी अधिक सटीक हो सकेगी।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इस बदलाव को सफल बनाने के लिए तकनीकी सहायता, आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने की व्यापक व्यवस्था की है। सभी स्तरों पर कर्मचारियों से भी अपेक्षा की गई है कि वे इस प्रणाली को अपनाएं और समयपालन के प्रति सजग और जिम्मेदार रहें।
मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहल का समर्थन करते हुए कर्मचारियों को सतर्क रहने और अपने अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से करने का आह्वान किया है। यह कदम छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक सुधारों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
यद्यपि इस प्रणाली से जुड़े कुछ तकनीकी और संचालन संबंधी चुनौतियां हो सकती हैं, जैसे दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या या तकनीकी प्रशिक्षण की कमी। इसके लिए सरकार ने आपातकालीन सपोर्ट टीम गठित की है जो समय-समय पर तकनीकी मुद्दों का समाधान करेगी।
साथ ही, आम कर्मचारियों के लिए लगातार जागरूकता और प्रशिक्षण अभियान भी चलाए जाएंगे ताकि सभी लोग इस प्रणाली को समझें और सही तरीके से उपयोग कर सकें।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह नई पहल एक डिजिटल और पारदर्शी शासन नीति को सशक्त बनाने का प्रयास है। आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, जो प्रशासनिक दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए मील का पत्थर साबित होगा।




