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छत्तीसगढ़ में मतांतरण पर सरकार का कड़ा रुख, बजट सत्र में आएगा नया विधेयक; 10 साल की सजा का प्रावधान

15 अगस्त विज्ञापन


नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतांतरण का मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक विवाद का बड़ा कारण बनता जा रहा है। प्रदेश के 33 में से 17 जिलों में मतांतरण को लेकर तनाव की स्थिति सामने आई है। पिछले एक वर्ष में राज्यभर में मतांतरण से जुड़े 96 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक 32 मामले बिलासपुर जिले में सामने आए हैं। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार बजट सत्र में मतांतरण विरोधी कड़ा कानून लाने की तैयारी कर रही है।

सरकार द्वारा तैयार किए गए ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ के मसौदे को मंजूरी मिल चुकी है और इसे विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। प्रस्तावित कानून के अनुसार स्वैच्छिक मतांतरण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा।

प्रलोभन से मतांतरण पर सख्त सजा

नए विधेयक के तहत प्रलोभन, धोखाधड़ी या छल-कपट के जरिए कराए गए मतांतरण पर 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान होगा। सामूहिक मतांतरण के मामलों में सजा और भी कठोर होगी। साथ ही मतांतरण के 60 दिनों के भीतर घोषणा पत्र भरना अनिवार्य होगा और प्रशासन इसकी जांच करेगा कि यह स्वेच्छा से हुआ है या नहीं। अदालत पीड़ित को पांच लाख रुपये तक का मुआवजा देने का आदेश भी दे सकती है।

आधे से ज्यादा जिलों में विवाद

राज्य में वर्ष 2021 से जुलाई 2025 के बीच हिंदू और ईसाई समाज के बीच 102 बार टकराव की स्थिति बनी। इस दौरान कुल 44 एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें से 23 मामले मौजूदा साय सरकार के कार्यकाल में दर्ज किए गए। प्रदेश के 33 में से 17 जिलों राजनांदगांव, रायपुर, दुर्ग, कांकेर, बलरामपुर, बिलासपुर, नारायणपुर, जीपीएम, सरगुजा, सूरजपुर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बालोद, धमतरी, कबीरधाम और जशपुर में मतांतरण से जुड़े विवाद सामने आए हैं।

बिलासपुर और धमतरी बने हॉटस्पॉट

पिछले एक साल में बिलासपुर में सबसे ज्यादा 32 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद धमतरी में 29, रायपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज में 9-9 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इसके अलावा कांकेर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, जशपुर और नारायणपुर में भी मामले सामने आए हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में मतांतरित लोगों के अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी है।

हाई कोर्ट की टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी जनजातीय क्षेत्रों में प्रलोभन देकर कराए जा रहे मतांतरण को सामाजिक खतरा बताया है।

हालिया घटनाएं

हाल के समय में कई घटनाओं ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। राजनांदगांव में अवैध आश्रम के जरिए नाबालिगों के मतांतरण का मामला सामने आया, जबकि बिलासपुर में झाड़-फूंक के नाम पर मतांतरण की कोशिश का आरोप लगा। रायपुर में ‘चंगाई सभा’ को लेकर हंगामा हुआ और दुर्ग रेलवे स्टेशन से दो मिशनरी ननों को गिरफ्तार किया गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भी ऐसे मामले सामने आए थे, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार धीमी थी। वहीं वर्तमान साय सरकार मतांतरण मामलों में त्वरित कार्रवाई और सख्त कानून के जरिए इसे रोकने की तैयारी कर रही है।

यह भी पढ़ें- एलपीजी संकट से रसोई का बजट बिगड़ा, रायपुर में गैस सिलेंडर पर लगा कोटा सिस्टम, आज बंद रहेंगे बाटलिंग प्लांट, बढ़ेगा दबाव



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