छत्तीसगढ़ की बेटी रचेगी इतिहास, महिमा राजपूत बनाएंगी मून सैटेलाइट, दुनिया के 108 देशों की 12 हजार छात्राओं के बीच बनाई जगह

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। एक जानकारी, एक शिक्षक का मार्गदर्शन और सीखने की लगन किसी भी छात्र के सपनों को नई उड़ान दे सकती है। इसकी मिसाल हैं रायपुर के स्वामी आत्मानंद स्कूल की छात्रा महिमा राजपूत, जिन्होंने 365 ऑनलाइन लेसन, 21 मॉड्यूल और लगातार होने वाले टेस्ट की चुनौती पार कर अब चांद मिशन से जुड़ी राष्ट्रीय कार्यशाला में जगह बनाई है। उनका चयन ‘शक्तिसैट’ के लिए हुआ है।
स्कूल से मिली प्रेरणा और अंतरिक्ष विज्ञान में बढ़ी रुचि
दसवीं की छात्रा महिमा बताती हैं कि इस मिशन की जानकारी उन्हें सबसे पहले स्कूल की प्राचार्य से मिली। इसके बाद विज्ञान शिक्षिका योगेश्वरी लहरी ने उन्हें विस्तार से समझाया और आवेदन के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में यह सिर्फ एक नया अवसर लगा, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने पढ़ाई शुरू की, अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञासा बढ़ती गई।
“कोर्स में सैटेलाइट बनाने के मूल सिद्धांत, अंतरिक्ष विज्ञान और उससे जुड़ी वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाया गया था। मुझे गणित और विज्ञान पहले से पसंद थे, इसलिए हर नया अध्याय पढ़ने के साथ मेरी रुचि और बढ़ती गई,” महिमा कहती हैं।
कठिन ऑनलाइन कोर्स और समय का प्रबंधन
पूरा प्रशिक्षण ऑनलाइन था। इसमें 21 मॉड्यूल और 365 लेसन शामिल थे। हर लेसन पूरा करने के बाद ऑनलाइन टेस्ट देना अनिवार्य था। स्कूल की नियमित पढ़ाई के साथ इस कोर्स को पूरा करना आसान नहीं था, इसलिए उन्होंने समय का अलग से प्रबंधन किया। रोजाना पढ़ाई, असाइनमेंट और टेस्ट के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने सभी चरण पूरे किए।
मिशन की एंबेसडर ने लिया साक्षात्कार
सभी मॉड्यूल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद मिशन की एंबेसडर विंग कमांडर डॉ. जया तारे ने उनका साक्षात्कार लिया। इस चरण में भी सफल रहने पर महिमा का चयन अगले स्तर के लिए हो गया।
सही समय पर सही मार्गदर्शन जरूरी
राजनांदगांव निवासी कीर्ति सिंह की पुत्री महिमा का मानना है कि यदि विद्यार्थियों को सही समय पर सही मार्गदर्शन और अवसर मिल जाए, तो वे बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
मेहनत और प्रतिभा से पाई सफलता
महिमा की गाइड शिक्षिका योगेश्वरी लहरी ने बताया कि हजारों आवेदनों में से वैज्ञानिक समझ, शैक्षणिक प्रदर्शन, तार्किक क्षमता और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि के आधार पर चुनिंदा छात्रों का चयन हुआ। महिमा ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से यह उपलब्धि हासिल की। चयन के बाद उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट इंजीनियरिंग, मिशन संचालन और सैटेलाइट तकनीक का विशेष प्रशिक्षण भी पूरा किया।
दिल्ली में 23 अगस्त को कार्यशाला और सैटेलाइट लॉन्चिंग
राजधानी रायपुर के गुढ़ियारी स्थित स्कूल की छात्रा महिमा अब 23 अगस्त को दिल्ली में आयोजित विशेष कार्यशाला में हिस्सा लेंगी। यहां देशभर से चयनित छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर दो सैटेलाइट तैयार किए जाएंगे। इनमें से एक सैटेलाइट चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा, जबकि दूसरा चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए तैयार किया जाएगा। इन मिशनों की निगरानी भी विद्यार्थियों की टीम करेगी, जिससे उन्हें वास्तविक अंतरिक्ष मिशन की कार्यप्रणाली को समझने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इस सैटेलाइट की लॉन्चिंग 11 अक्टूबर को होगी।
वैश्विक पहल ‘शक्तिसैट’ का उद्देश्य
स्पेस किड्ज इंडिया की एक महत्वाकांक्षी वैश्विक पहल शक्तिसैट है। इसका उद्देश्य दुनिया के 108 देशों की लगभग 12 हजार छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान, सैटेलाइट इंजीनियरिंग और साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स शिक्षा से जोड़ना है।



