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छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को बड़ा झटका, हाई कोर्ट ने हेड मास्टर प्रमोशन पर लगाई रोक, पुराने नियमों को माना गलत

15 अगस्त विज्ञापन


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हेड मास्टर पदोन्नति पर रोक लगा दी है। इसके तहत हाई कोर्ट ने बस्तर संभाग में किए गए प्रधानपाठक पदोन्नति आदेश पर तत्काल प्रभाव से …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 10 Apr 2026 09:13:46 PM (IST)Updated Date: Fri, 10 Apr 2026 09:13:46 PM (IST)

बिना टीईटी (TET) नहीं बन पाएंगे हेडमास्टर।

HighLights

  1. बिना टीईटी (TET) नहीं बन पाएंगे हेडमास्टर
  2. हाई कोर्ट ने पदोन्नति आदेश को माना अमान्य
  3. संघ बोला- पुराने शिक्षकों के साथ है अन्याय

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हेड मास्टर पदोन्नति पर रोक लगा दी है। इसके तहत हाई कोर्ट ने बस्तर संभाग में किए गए प्रधानपाठक पदोन्नति आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है। अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया कि 23 मार्च 2026 का पदोन्नति आदेश निरस्त हो चुके 2019 नियमों के आधार पर जारी किया गया था। जबकि नए 2026 नियम 13 फरवरी से लागू कर दिए गए हैं।

शिक्षकों ने याचिका दायर कर दी थी चुनौती

दुर्गेश कुमार कश्यप व अन्य शिक्षकों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता देवाशीष तिवारी व राज्य की ओर से अधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने पैरवी की। सिंगल बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता देवाशीष तिवारी ने कहा कि पदोन्नति आदेश कानूनी रूप से अमान्य है, इसे पुराने नियमों के तहत जारी किया गया है।

टीईटी अनिवार्यता और कानूनी दलीलें

अधिवक्ता ने कहा कि 2026 के नियमों में टीईटी अनिवार्य योग्यता है, जबकि जिन शिक्षकों को पदोन्नति दी गई, वे टीईटी पास नहीं हैं। अधिवक्ता ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा जारी पदोन्नति आदेश आरटीई अधिनियम, एनसीटीई विनियम, और सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले के खिलाफ है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि टीईटी के बिना पदोन्नति का कोई हक नहीं है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद पदोन्नति आदेश के संचालन व क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।

यह भी पढ़ें- बालोद में मजिस्ट्रेट को परिवार समेत जान से मारने की धमकी: 3 करोड़ की मांगी फिरौती, माओवादी संगठन के नाम से भेजा लेटर

पदोन्नति प्रक्रिया पर बढ़ी अनिश्चितता

इसके साथ ही अब हेडमास्टर पदोन्नति प्रक्रिया पर अनिश्चितता बढ़ गई है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि नई नियमावली (2026 नियम) और एनसीटीई मानकों के अनुसार ही पदोन्नति प्रक्रिया दोबारा संचालित की जाए। छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष रवीन्द्र राठौर ने कहा कि एनसीटीई नियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य करना बिल्कुल गलत है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पुराने शिक्षकों के हितों को चोट पहुंचाता है। राज्य सरकार तुरंत समीक्षा याचिका दाखिल करें, अन्यथा हमारा संघ स्वयं सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल करेगा।



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