छत्तीसगढ़ का मोस्ट वांटेड नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार, 55 जवानों की हत्या का आरोपी


छत्तीसगढ़ के मोस्ट वांटेड नक्सली मिसिर बेसरा को झारखंड में गिरफ्तार कर लिया गया है। डेढ़ करोड़ के इनामी इस नक्सली पर 55 जवानों की हत्या का आरोप है। सुरक्षाबलों ने मंगलवार (28 जुलाई) को घेराबंदी कर उसे और उसके दो साथियों को पकड़ा। मिसिर बेसरा बस्तर में माओवादी नेटवर्क को फैलाने और झारखंड में IED ब्लास्ट की कई घटनाओं में शामिल रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में जवानों ने शहादत दी थी। उसकी गिरफ्तारी को सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ और झारखंड में आतंक का पर्याय बना मोस्ट वांटेड नक्सली मिसिर बेसरा आखिरकार सुरक्षाबलों के हत्थे चढ़ गया है। झारखंड में मंगलवार (28 जुलाई) को एक विशेष अभियान के तहत सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर उसे और उसके दो अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया। मिसिर बेसरा पर डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम घोषित था और वह 55 जवानों की हत्या समेत कई गंभीर वारदातों में वांछित था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा उर्फ ‘भास्कर’ उर्फ ‘सागर’ उर्फ ‘दीपक’ माओवादी संगठन में केंद्रीय कमेटी का सदस्य था और उसकी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को मजबूत करने में अहम भूमिका रही है। वह झारखंड में हुए कई बड़े IED ब्लास्ट का भी मुख्य आरोपी था, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। उसकी गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे माओवादी संगठन को गहरा झटका लगा है।
मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से अभियान चला रही थीं। खुफिया जानकारी के आधार पर झारखंड के एक दुर्गम क्षेत्र में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने सटीक घेराबंदी की और उसे उसके दो साथियों के साथ धर दबोचा। पकड़े गए अन्य दो नक्सलियों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वे भी संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य थे।
इस गिरफ्तारी से छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों राज्यों में नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। पुलिस और सुरक्षा बल अब इन नक्सलियों से पूछताछ कर संगठन की आगे की रणनीति और उनके ठिकानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने का प्रयास करेंगे। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आम जनता और सुरक्षाबलों दोनों में ही विश्वास का माहौल मजबूत हुआ है।




