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Chhattisgarh: टेंडर से संपत्ति तक… कैसे बना 3200 करोड़ का शराब घोटाला? जांच में नए तथ्य सामने

15 अगस्त विज्ञापन


छत्तीसगढ़ में उजागर हुए 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क आबकारी विभाग के तत्कालीन आयुक्त एवं सचिव निरंजन दास की कार्यकाल अवधि में फलने–फूलने लगा। विभाग में लगभग तीन वर्ष तक महत्वपूर्ण पद संभालते हुए आबकारी नीति में बदलाव, अधिनियमों के संशोधन और टेंडर की शर्तों में हेरफेर के जरिए अवैध कमाई का रास्ता तैयार किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया को कुछ खास व्यक्तियों को फायदा पहुँचाने और भारी भरकम अवैध वसूली करने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित रैकेट को चलाने के बदले हर महीने निरंजन दास को लगभग पचास लाख रुपये पहुंचाए जाते थे। अब तक की विवेचना में करीब सोलह करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति का पता चल चुका है, जो उनके नाम और परिजनों के नाम पर खरीदी गई विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश के रूप में पाई गई है। EOW का मानना है कि आगे की जांच इस राशि को और अधिक बढ़ा सकती है। इस पूरे सिस्टम के संचालन में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर के संरक्षण की बात भी दस्तावेजों और गवाहों के बयान में सामने आई है।

इस बीच EOW ने बुधवार को विशेष न्यायाधीश की अदालत में 7वां पूरक चालान दाखिल किया, जो लगभग 6300 पन्नों का बताया जा रहा है। यह चालान जांच की 90 दिन की समयसीमा पूरी होने से ठीक पहले पेश किया गया। दस्तावेज़ों में विस्तार से उल्लेख किया गया है कि घोटाले की जानकारी होने और अवैध वसूली की गतिविधियों की भनक लगने के बावजूद विभाग के शीर्ष अधिकारी निरंजन दास ने कोई कार्रवाई नहीं की और तमाम अनियमितताओं को नज़रअंदाज़ कर दिया।

चालान दाखिल होने के दौरान निरंजन दास, नितेश पुरोहित, उनके पुत्र यश पुरोहित, अतुल सिंह, मुकेश मनचंदा और दीपेन चावड़ा—इनमें से किसी भी आरोपी को अदालत में शारीरिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया। सभी की उपस्थिति वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज कराई गई। अदालत ने इस प्रकरण की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2026 निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि इस शराब घोटाले में अब तक कुल पचास आरोपियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू अदालत में चालान दाखिल कर चुकी है, जबकि कई बिंदुओं पर जांच अभी भी जारी है और आगे और नामों के जुड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा रहा।



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