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CG News: राज्य की प्रमोशन नीति सही, कोर्ट के आदेश के बाद प्राचार्य प्रमोशन का रास्ता साफ

15 अगस्त विज्ञापन


कोई गड़बड़ी नहीं कीः राज्य सरकार

मामले में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने प्राचार्य पद के लिए बीएड डिग्री को अनिवार्य बताया था। इसके अलावा, उन्होंने माध्यमिक स्कूलों के प्रधान पाठकों से लेक्चरर बने शिक्षकों की वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि प्रमोशन नियम को लेकर सभी कैटेगरी के शिक्षकों के हितों का ध्यान रखा गया। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। कोर्ट ने तर्कों से सहमत होकर याचिकाएं खारिज कर दी।

अब पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू

मार्च 2025 में हाईकोर्ट में प्राचार्य प्रमोशन प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार ने भी कोर्ट को आश्वस्त किया था कि सुनवाई और कोर्ट के फैसले से पहले प्रमोशन लिस्ट जारी नहीं की जाएगी। लेकिन 30 अप्रैल को ही राज्य शासन ने प्राचार्यों की पदोन्नति सूची जारी की। इसमें ई संवर्ग के 1524 एवं टी संवर्ग के 1401 शिक्षकों समेत कुल 2925 शिक्षकों की सूची जारी की गई। जबकि प्रमोशन से प्रभावित लेक्चरर व शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा इस मुद्दे पर लगतार याचिकाएं दायर की जा रही थीं। इस पर 1 मई को हाईकोर्ट ने प्राचार्य प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगा दी। साथ ही शिक्षकों की पोस्टिंग भी अमान्य कर दी थी। अब पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकेगी।



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15 अगस्त विज्ञापन
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