Uncategorized
बस्तर दशहरा की परंपरा! आज भी गूंजती है जनता की आवाज… क्या है “मुरिया दरबार”?

मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की प्रमुख और पारंपरिक रस्मों में से एक है, जो छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति और जनसंवाद की ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाता है। रियासत काल में जब बस्तर में राजशाही थी, उस समय यह दरबार बस्तर के राजा द्वारा लगाया जाता था, जिसमें वे मुरिया जनजाति सहित रियासत के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनते थे और मौके पर ही उनका निपटारा करते थे। यह दरबार न्याय, संवाद और सहभागिता का एक जीवंत मंच था, जहाँ जनता बिना किसी औपचारिकता के सीधे राजा से संवाद कर सकती थी।
15 अगस्त विज्ञापन



