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बर्लिन में प्राइड परेड पर हमला: 24 घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया संदिग्ध, एक की मौत, 29 घायल

15 अगस्त विज्ञापन


जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित प्राइड समारोह के दौरान हुए भीषण हमले के मुख्य संदिग्ध को पुलिस ने लगभग 24 घंटे की तलाश के बाद रविवार को मुठभेड़ में मार गिराया। इस हमले में एक महिला की मौत हो गई, जबकि 29 लोग घायल हुए। अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध अब्दुल बल्लाउट ने पहले भी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होने की कोशिश की थी। प्रारंभिक जांच में इसे इस्लामी चरमपंथ से प्रेरित आतंकी हमला माना जा रहा है।

कौन था मारा गया संदिग्ध अब्दुल बल्लाउट?

अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध अब्दुल बल्लाउट जर्मनी का नागरिक था और उसके पारिवारिक संबंध लेबनान से थे। अभियोजन पक्ष ने बताया कि उसने पहले आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होने की कोशिश की थी। शनिवार रात बर्लिन के डाउनटाउन इलाके में उसने कथित तौर पर एक वैन भीड़ पर चढ़ा दी और इसके बाद माचेते (बड़ी धारदार तलवार) से लोगों पर हमला किया। अधिकारियों का मानना है कि यह इस्लामी चरमपंथ से प्रेरित आतंकी हमला था।


हमला कहां हुआ और पुलिस ने उसे कैसे ढूंढ निकाला?

जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट ने बताया कि हमला ब्रांडेनबर्ग गेट के पास आयोजित प्राइड समापन समारोह से कुछ सौ मीटर की दूरी पर हुआ। करीब 24 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद रविवार शाम लगभग छह बजे पुलिस ने बर्लिन के स्पांडाउ उपनगर के एक बगीचे में संदिग्ध को घेर लिया। पुलिस के अनुसार, वह एक धारदार हथियार लेकर जवानों की ओर दौड़ा, जिसके बाद पुलिस ने उस पर गोली चलाई। घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई।

संदिग्ध का आतंकी नेटवर्क से क्या संबंध था?

अभियोजकों के अनुसार, वर्ष 2025 में बल्लाउट लेबनान गया था, जहां से उसका उद्देश्य सीरिया जाकर इस्लामिक स्टेट में शामिल होना था। वहां उसने उन लोगों से संपर्क किया, जिन्हें आईएस का सदस्य माना जाता था या कम से कम वह उन्हें ऐसा समझता था। लेबनान में उसे धार्मिक और सांप्रदायिक विद्वेष भड़काने समेत कई आरोपों में गिरफ्तार किया गया और सैन्य अदालत ने तीन महीने की सजा सुनाई। सजा पूरी करने के बाद वह जर्मनी लौटा, जहां बर्लिन एयरपोर्ट पर उसे फिर गिरफ्तार कर लिया गया।

पहले भी क्यों हो चुकी थी गिरफ्तारी और रिहाई?

मई में बर्लिन की एक किशोर अदालत ने बल्लाउट को राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर हिंसक वारदात की तैयारी करने, इंस्टाग्राम पर इस्लामिक स्टेट का प्रचार करने और अन्य आरोपों में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे एक वर्ष दस महीने की निलंबित सजा सुनाई थी। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। अदालत ने कहा था कि उसने जर्मनी और लेबनान में बिताई गई उसकी न्यायिक हिरासत, अपराध स्वीकार करने, आईएस से दूरी बनाने के दावों और किसी वास्तविक आतंकी वारदात के न होने को ध्यान में रखते हुए उसे राहत दी थी। अपील लंबित रहने तक उसे रिहा कर दिया गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों और एलजीबीटीक्यू समुदाय ने क्या कहा?

ब्रिटेन की 26 वर्षीय एश्ले जंप प्राइड परेड में शामिल होने के लिए बर्लिन आई थीं, लेकिन हमले से पहले कार्यक्रम से निकल गई थीं। रविवार को वे घटनास्थल के पास बने स्मारक पर फूल चढ़ाने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि वे हमें कभी मिटा नहीं सकते। जब तक मानवता रहेगी, हम भी रहेंगे। हमें खत्म नहीं किया जा सकता।  राष्ट्रीय एलजीबीटीक्यू और संगठन एलएसवीडी के वरिष्ठ अधिकारी आंद्रे लेहमन ने कहा, ‘जो हुआ, उससे हम स्तब्ध हैं। यह संदिग्ध हमला सीधे क्वीयर समुदाय के दिल पर वार है।’

हमला आखिर कैसे हुआ था?

पुलिस के अनुसार, शनिवार रात करीब 10 बजे एक सफेद वैन टियरगार्टन पार्क में भीड़ के बीच घुस गई और कई लोगों को कुचलते हुए एक पेड़ से टकरा गई। उसी समय पास के ब्रांडेनबर्ग गेट पर क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे (प्राइड) का समापन समारोह चल रहा था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हमला मुख्य परेड, उसके मार्ग या समापन समारोह के भीतर नहीं हुआ, बल्कि उससे कुछ सौ मीटर दूर पार्क के एक रास्ते पर हुआ, जहां मौजूद लोगों में प्राइड समारोह में आए लोग और अन्य स्थानीय नागरिक व पर्यटक शामिल थे।  


हमले के बाद लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?

रविवार दोपहर सैकड़ों लोग ब्रांडेनबर्ग गेट स्थित स्मारक पर पहुंचे। लोगों ने फूल, मोमबत्तियां, इंद्रधनुषी झंडे और हस्तनिर्मित संदेश रखे। एक तख्ती पर लिखा था, ‘नफरत से ज्यादा ताकतवर सिर्फ प्यार है।’ शनिवार को इस आयोजन में सैकड़ों हजार लोग शामिल हुए थे। हालांकि देर रात तक कार्यक्रम में कितने लोग मौजूद थे, यह स्पष्ट नहीं है। बर्लिन का प्राइड उत्सव यूरोप के सबसे बड़े एलजीबीटीक्यू आयोजनों में गिना जाता है।

 

सरकार ने क्या संदेश दिया और सुरक्षा पर क्या फैसला हुआ?

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बर्लिन ही नहीं, पूरे जर्मनी में क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे में शामिल लोगों से मैं कहना चाहता हूं कि डरिए मत। ऐसे हमलों का मकसद समाज को बांटना और हमारी आजादी तथा खुलेपन को खत्म करना है। गृह मंत्री डोब्रिंट ने कहा कि जर्मनी में होने वाले अन्य बड़े आयोजनों, विशेषकर प्राइड कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उसे और मजबूत किया जाएगा।

क्या बर्लिन पहले भी ऐसे हमले झेल चुका है?

बर्लिन इससे पहले भी इस्लामी चरमपंथी हमलों का सामना कर चुका है। दिसंबर 2016 में ट्यूनीशिया के एक अस्वीकृत शरणार्थी ने एक ट्रक को क्रिसमस बाजार में घुसा दिया था, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों घायल हुए थे। बाद में वह इटली में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पिछले वर्ष फरवरी में बर्लिन के होलोकॉस्ट मेमोरियल पर एक स्पेनिश पर्यटक पर चाकू से हमला किया गया था। इस मामले में एक सीरियाई नागरिक को मार्च में दोषी ठहराते हुए 13 वर्ष की सजा सुनाई गई।

ये भी पढ़ें: US कोर्ट ने ट्रंप को दिया झटका: मिड-टर्म चुनावों में मेल बैलेट नियम नहीं होंगे लागू, क्या था आदेश?

क्या एम्स्टर्डम ने भी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है?

इस सप्ताह नीदरलैंड्स का एम्स्टर्डम शहर वर्ल्ड प्राइड और अपने वार्षिक प्राइड समारोह की मेजबानी करेगा। शहर की मेयर फेमके हालसेमा ने कहा कि बर्लिन हमले के बाद प्रशासन और आयोजक सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। हालांकि उनका उद्देश्य यह भी है कि अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम आजादी, प्रेम और समानता के इस उत्सव में बाधा न बनें।



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