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बिलासपुर: प्रोफेसर के बेटे ने किया सुसाइड, 4 महीने पहले ऑनलाइन खरीदी थी’सायनाइड’, पढ़ाई के तनाव में दी जान

15 अगस्त विज्ञापन


सरकंडा क्षेत्र के लोधीपारा के पास अचेत अवस्था में मिले सेंट्रल विवि के प्रोफेसर दंपती के पुत्र यशवर्धन सिंह को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने उसे तत्का …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 09 Apr 2026 09:44:27 PM (IST)Updated Date: Thu, 09 Apr 2026 09:44:27 PM (IST)

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सरकंडा क्षेत्र के लोधीपारा के पास अचेत अवस्था में मिले सेंट्रल विवि के प्रोफेसर दंपती के पुत्र यशवर्धन सिंह को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने उसे तत्काल पुराना सरकंडा स्थित प्रज्ञा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था।

इलाज शुरू होने के बाद जैसे ही माता-पिता को सूचना मिली, वे मौके पर पहुंचे और बेहतर उपचार की उम्मीद में उसे अपोलो अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पुलिस को यशवर्धन की स्कूटी के हुक पर टंगी पॉलिथीन से 400 ग्राम सायनाइड का डिब्बा बरामद हुआ है। ऑनलाइन सायनाइड मंगाने की पुष्टि उनके पिता ने की है।

चार महीने पहले ही कर ली थी सुसाइड की प्लानिंग

कोनी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संतोष सिंह ठाकुर के बेटे यशवर्धन ने पढ़ाई के तनाव में यह आत्मघाती कदम उठाया होगा, यह बातें अब तक की जांच में सामने आ रही हैं। मंगलवार शाम जब राधा-कृष्ण मंदिर के पास राहगीरों को यशवर्धन अचेत पड़ा दिखाई दिया था, तब राहगीरों ने सक्रियता दिखाते हुए उसे प्रज्ञा अस्पताल पहुंचाया था।

पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली बात पता चली कि यशवर्धन ने सुसाइड की प्लानिंग चार महीने पहले ही कर ली थी और इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म से सायनाइड मंगवाई थी। पुलिस ने इस ऑनलाइन खरीद की रसीद जब्त कर ली है।

प्रज्ञा से अपोलो तक जद्दोजहद

यशवर्धन को बचाने की जद्दोजहद प्रज्ञा अस्पताल से शुरू हुई थी। प्राथमिक उपचार के दौरान ही डॉक्टरों को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा हो गया था। बाद में अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया। सायनाइड का सेवन करने के बाद छात्र स्कूटी से लोधीपारा तक कैसे पहुंचा और जहर का डिब्बा स्कूटी में ही क्यों लटका रहा, पुलिस अब इन कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

छात्र के पिता के बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने वह रसीद बरामद कर ली है, जिससे पता चला कि सायनाइड चार महीने पहले ही घर पहुंच चुकी थी। इतने खतरनाक रसायन की ऑनलाइन होम डिलीवरी ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पढ़ाई के दबाव में डिप्रेशन का इलाज करा रहे छात्र के पास महीनों तक मौत का यह सामान मौजूद था और किसी को भनक तक नहीं लगी।



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