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Bengal Elections: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव हटे; जानें किसे मिली नई जिम्मेदारी

15 अगस्त विज्ञापन


विधानसभा चुनाव की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव को बदलने का फैसला किया है। चुनाव की तारीखों के एलान के बाद रविवार रात आयोग ने यह आदेश जारी किया। आयोग के निर्देश के अनुसार राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब दुष्यंत नारियावाला को नया मुख्य सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है।

हटाए जा सकते हैं डीपीपी और सीपी भी

इस बीच, सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर भी हटाए जा सकते हैं। चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इस

दौरान चुनाव आयोग को प्रशासनिक स्तर पर कई विशेष अधिकार मिल जाते हैं। आयोग जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक पदों पर तैनात अफसरों के तबादले या बदलाव का आदेश दे सकता है।

पिछले चुनावों में भी आयोग ने कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों को बदला था। कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित कई वरिष्ठ पदों पर भी चुनाव से पहले तबादले के उदाहरण मिलते रहे हैं। हालांकि इस स्तर के शीर्ष पदों पर बदलाव हाल के वर्षों में बहुत कम देखने को मिला है।

 

दुश्यंत नरियाला बने नए मुख्य सचिव

नए मुख्य सचिव बनाए गए दुश्यंत नारियावाला वर्ष 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वह राज्य सरकार के उत्तर बंगाल विकास विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली है। अतिरिक्त प्रभार के रूप में वह पहले सिंचाई विभाग का कामकाज भी देख चुके हैं। अब नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटाकर आयोग ने दुष्यंत नारियावाला को ही राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। चुनाव आयोग ने उन्हें सोमवार दोपहर तीन बजे तक अपना पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है।

संघमित्रा घोष को मिली गृह सचिव की जिम्मेदारी

वहीं राज्य के नए गृह सचिव के रूप में संघमित्रा घोष को नियुक्त किया गया है। गृह विभाग चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए यह पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा मतदान

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव की तारीखों का एलान रविवार (15 मार्च) को चुनाव आयोग ने कर दिया। निर्वाचन आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में चरणबद्ध तरीके से अधिसूचना जारी होने से लेकर नामांकन दाखिल करने और मतदान की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख जारी कर दी। इसके मुताबिक, बंगाल में इस बार सिर्फ दो चरणों में ही चुनाव कराया जाएगा। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को राज्य में मतदान होगा। वहीं, चार मई को मतगणना तय की गई है। 

चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण की अधिसूचना 30 मार्च को जारी की जाएगी, जबकि दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी। पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय की गई है, वहीं दूसरे चरण के लिए 9 अप्रैल तक नामांकन किया जा सकेगा। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच क्रमशः 7 अप्रैल और 10 अप्रैल को होगी। वहीं उम्मीदवार पहले चरण के लिए 9 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं।

आदर्श आचार संहिता क्या है?

आदर्श आचार संहिता राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए निर्धारित किए गए मानकों का एक ऐसा समूह है जिसे राजनैतिक दलों की सहमति से तैयार किया गया है। आदर्श आचार संहिता में चुनाव आयोग की भूमिका अहम होती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों का आयोजन चुनाव आयोग का सांविधानिक कर्तव्य है। 

आदर्श आचार संहिता कितने दिनों तक लागू रहती है?

चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा की तारीख से इसे लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है। लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता पूरे देश में, जबकि विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे राज्य में लागू होती है।





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