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बस्तर दशहरा: सिरहासार भवन में होगी डेरी गड़ाई की रस्म, बिलोरी से आएंगे दो विशेष काष्ठ स्तंभ

15 अगस्त विज्ञापन

जगदलपुर में विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की पारंपरिक रस्मों का सिलसिला जारी है। गुरुवार को सिरहासार भवन में डेरी गड़ाई की रस्म पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न होगी। इस रस्म के साथ बस्तर दशहरा के मांगलिक मंडप की आधारशिला रखी जाएगी।

इसके लिए नगर सीमा से लगे ग्राम बिलोरी से दो विशेष काष्ठ स्तंभ लाए जाएंगे। पूजा-अर्चना के बाद इन्हें सिरहासार भवन परिसर में स्थापित किया जाएगा।

परंपरा के अनुसार, बिलोरी गांव के ग्रामीण दो विशेष लकड़ियां लेकर सिरहासार पहुंचेंगे। इन्हें डेरी कहा जाता है। सिरहासार भवन में इनकी विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद दोनों डेरी की स्थापना की जाएगी।

बस्तर दशहरा में डेरी गड़ाई की रस्म को मंडप आच्छादन की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जाता है। डेरी स्थापना के बाद हल्दी डेरी गड़ाई की रस्म खेली जाएगी।

हल्दी डेरी गड़ाई की रस्म पूरी होने के बाद मेंबरीन पारंपरिक रूप से हल्दी खेलेंगे। हल्दी उत्सव के साथ सिरहासार में दशहरा का माहौल और अधिक उल्लासमय हो जाएगा। यह रस्म बस्तर की लोक-संस्कृति और देव परंपराओं से जुड़ी हुई है।

डेरी गड़ाई और मंडप आच्छादन के इस पारंपरिक आयोजन में बस्तर के अलग-अलग परगनों से मांझी, चालकी, सिरहा-गुनिया और पारंपरिक पुजारी शामिल होंगे।

रस्म के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके साथ ही बस्तर दशहरा की आगामी प्रमुख रस्मों के लिए सिरहासार परिसर तैयार होगा।

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