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बंदूक की जगह अब विकास की आवाज, माओवाद के साये से निकलकर कोलेंग वनांचल में बदली तस्वीर, जानें कैसे

15 अगस्त विज्ञापन


एक समय था जब बारिश के दिनों में कोलेंग और उसके आसपास के गांव टापू बन जाते थे और ग्रामीणों को आवागमन के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। जगदलपुर से लेकर कोलेंग, चांदामेटा, छिंदगुर, काचीरास, सरगीपाल और कान्दानार जैसे दुर्गम गांवों तक बारहमासी पक्की सड़कों का जाल बिछ जाने से न केवल आवाजाही सुगम हुई है, बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आपातकालीन सेवाएं भी अब ग्रामीणों की पहुंच में हैं।



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