छत्तीसगढ़ UCC: लिव-इन में रहने पर अब कराना होगा रजिस्ट्रेशन, तोड़ने पर भी देनी होगी सूचना

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रस्तावित ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कई महत्वपूर्ण और कड़े प्रावधानों को शामिल करने की तैयारी चल रही है। इन प्रस्तावित नियमों के तहत, यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहने का निर्णय लेता है, तो उन्हें इसकी जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में अनिवार्य रूप से दर्ज करानी पड़ सकती है। इसी तरह, यदि कोई जोड़ा इस रिश्ते को समाप्त करने का फैसला करता है, तो उन्हें भी इसकी सूचना सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करानी होगी।
यूसीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला साथी को गुजारा भत्ता प्रदान करने का भी प्रस्ताव है। इसके लिए महिला को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इसके अतिरिक्त, ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों के अधिकारों को भी सुनिश्चित किया जाएगा। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, इन बच्चों को वैध संतान का दर्जा दिया जाएगा और उन्हें पिता की पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त होंगे। यह कदम लिव-इन संबंधों से जुड़े सामाजिक और कानूनी पहलुओं को संबोधित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
यूसीसी पर आम लोगों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और विभिन्न समुदायों से एक हजार से अधिक सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इन सुझावों और आपत्तियों का गहन अध्ययन करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति 30 नवंबर तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए ड्राफ्ट को दिसंबर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
समिति का गठन राज्य सरकार द्वारा जून 2026 में किया गया था। समिति ने यूसीसी पर सुझाव प्राप्त करने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया, जिनमें ई-मेल, वेबसाइट, डाक और प्रत्यक्ष माध्यम शामिल थे। ऑनलाइन सुझाव और आपत्तियां भेजने की समय-सीमा 30 अक्टूबर को समाप्त हो गई थी। अब समिति प्राप्त सभी सुझावों और मौजूदा कानूनों का गहन अध्ययन कर अंतिम प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में है।
समिति ने यूसीसी पर जनमत जानने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों में बैठकें आयोजित कीं। इन बैठकों में रायपुर, दुर्ग, अंबिकापुर, सूरजपुर और बस्तर संभाग के तीन जिलों में आम लोगों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सीधे सुझाव लिए गए। इन परामर्श सत्रों का उद्देश्य विभिन्न वर्गों की राय और चिंताओं को समझना था ताकि एक समावेशी और स्वीकार्य प्रारूप तैयार किया जा सके।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर मिले सुझावों के आधार पर, जोड़े का रजिस्ट्रार के पास अनिवार्य पंजीयन करने की तैयारी है। यदि जोड़े में से कोई एक या दोनों संबंध समाप्त करना चाहते हैं, तो इसकी सूचना रजिस्ट्रार के पास दर्ज करानी होगी। साथ ही, इसकी एक प्रति दूसरे पार्टनर को भेजने का प्रावधान भी प्रस्तावित है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और जेल तक की सजा का प्रावधान भी विचाराधीन है, ताकि इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अलग-अलग समुदायों की राय मिली है। तलाक की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न धर्मों से भी सुझाव प्राप्त हुए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने और तलाक के लिए समान कानून लागू करने की भी बात कही गई है, जिससे इन मामलों में एकरूपता लाई जा सके।
यूसीसी को लेकर बस्तर और सरगुजा संभाग में आदिवासी समाज की ओर से विरोध और असहमति की स्थिति सामने आई थी। आदिवासी समाज ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान पर संभावित असर पड़ने की चिंता व्यक्त की थी। ऐसे में, समिति के सामने प्रारूप तैयार करते समय आदिवासी समाज के विशिष्ट रीति-रिवाजों और उनकी मूल भावना का संरक्षण सुनिश्चित करने की एक बड़ी चुनौती है। समिति इन संवेदनशील पहलुओं का कानूनी और सामाजिक अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट में इन चिंताओं को भी संबोधित करेगी।




