छत्तीसगढ़ के 29 लाख बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी, ‘सेंट्रल किचन’ से सीधे थाली तक पहुंचेगा पौष्टिक और गर्मागर्म खाना

‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना’ के अंतर्गत अब सूबे के 29 लाख से भी अधिक विद्यार्थियों को आधुनिक ‘सेंट्रल किचन’ में तैयार किया गया पौष्टिक और ग…और पढ़ें
HighLights
- स्कूलों में पहली से आठवीं तक ‘सेंट्रल किचन’ से पहुंचेगा पौष्टिक भोजन
- इस योजना से सरकारी स्कूलों के 29 लाख बच्चों को मिलेगा फायदा
- इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ जोड़ा गया है
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य के शासकीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं की सेहत और पोषण स्तर को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार ने एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना’ के अंतर्गत अब सूबे के 29 लाख से भी अधिक विद्यार्थियों को आधुनिक ‘सेंट्रल किचन’ में तैयार किया गया पौष्टिक और गर्मागर्म खाना उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से अमलीजामा पहनाने के लिए मंत्रालय (महानदी भवन) में हाल ही में राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग सह संचालन समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
ठंडे भोजन की शिकायत होगी दूर
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव विकासशील ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि पहली से आठवीं कक्षा तक के प्रत्येक छात्र को अनिवार्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाला गरम भोजन और पूरक पोषण सामग्री दी जाए। दरअसल, प्रशासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि वर्तमान में भोजन वितरण के दौरान दूरी अधिक होने के कारण कुछ विद्यालयों तक पहुंचते-पहुंचते खाना ठंडा हो जाता है।
इस बाधा को दूर करने के लिए आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 की कार्ययोजना के तहत शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के स्कूलों को ‘सेंट्रल किचन’ मॉडल से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इस सेंट्रलाइज्ड सिस्टम से भोजन की शुद्धता, साफ-सफाई और पौष्टिकता का स्तर उत्कृष्ट बना रहेगा।
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खेती से जुड़ेंगी ग्रामीण महिलाएं, बढ़ेगी आमदनी
इस पोषण अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ जोड़ा गया है। मुख्य सचिव ने कृषि विभाग को निर्देश दिए थे कि कि वे मध्याह्न भोजन बनाने वाले स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को अपने क्षेत्रों में उन्नत तकनीक से हरी सब्जियां और मसाले उगाने के लिए प्रेरित व प्रशिक्षित करें। इस अंतर्विभागीय तालमेल से दोहरा फायदा होगा; बच्चों की थाली तक सीधे खेतों की ताजा सब्जियां पहुंचेंगी और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।




