छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के ध्यानाकर्षण के बाद बिलासपुर जिले में सर्पदंश के फर्जी आंकड़े और 17.24 करोड़ के मुआवजा घोटाले की जांच चल रही

15 अगस्त विज्ञापन

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के ध्यानाकर्षण के बाद बिलासपुर जिले में सर्पदंश के फर्जी आंकड़े और 17.24 करोड़ के मुआवजा घोटाले की जांच चल रही है। अब तक राजस्व विभाग के पत्र पर 14 मामलों में FIR दर्ज हो चुका है। मुआवजे के इस फर्जीवाड़े में तहसील और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ वकीलों और मृतकों के परिजन शामिल हैं।

राजस्व विभाग की इस जांच पर विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि, शासन ने जांच कराई यह स्वागतेय है। लेकिन, वो इस जांच से संतुष्ट नहीं है। क्योंकि 400 केस में करोड़ों रुपए का मुआवजा घोटाला हुआ है, जिसकी बारीकी से जांच और दोषियों पर कार्रवाई करने की जरूरत है। जिससे भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी न हो।

दरअसल, नागलोक कहे जाने वाले जशपुर जिले में पिछले 3 साल में केवल 96 मौतें दर्ज हुईं। जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। विधानसभा में काफी हंगामे के बाद इस पर सदन में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी।

सर्पदंश के फर्जी मामलों का खुलासा होने के बाद 24 दिनों के भीतर शहर के 5 थानों में 14 मामलों में FIR हो चुकी है। एक मामले में तहसीलदार ने रतनपुर पुलिस को एफआईआर के लिए पत्र लिखा है। इस तरह अबतक 15 मामले सामने आ चुके हैं। जांच में यह भी पता चला है कि कुछ मामलों में बिना परिजनों की सहमति के आरोपी मुआवजा लेकर बंदरबांट कर चुके हैं।

स्वास्थ्य, राजस्व, नगर निगम के दर्जन भर कर्मचारी शामिल

पुलिस ने इन मामलों में अब तक तहसील कार्यालय में निगम से अटैच ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा, अधिवक्ता खांडेकर, बिल्हा रंजीत चतुर्वेदी समेत दर्जन भर लोगों को पुलिस ने उठाया है। वहीं, जांच में सिम्स और अन्य तहसीलों के स्वास्थ्य केंद्रों के डॉक्टरों के नाम भी सामने आ रहे हैं।

फिलहाल, पुलिस डॉक्टरों के नाम का खुलासा नहीं कर रही है। तोरवा पुलिस ने 2 मामलों में बिल्हा के एक वकील समेत तीन लोगों को कोर्ट में पेश किया है। सरकंडा थाना में पांच मामले दर्ज है। सिविल लाइन और कोनी में 6 प्रकरण और कोतवाली थाने में एक मामला दर्ज किया गया है।

तहसील में वकील और बिचौलियों की फौज

बताया जा रहा है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के साथ ड्राइवर, चपरासी की अधिवक्ताओं से सांठगांठ है। यहां निगम से अटैच ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा पूर्व नाजिर निहाल ध्रुव के समय से छोटे मोटे काम कराना शुरू किया। इसके बाद कम्प्यूटर ऑपरेटर बन गया। पुलिस ने इससे भी दिनभर पूछताछ की है।

बिल्हा में परिजन और डॉक्टर के खिलाफ हो चुकी है FIR

बिल्हा क्षेत्र में सर्पदंश से हुई एक कथित मौत के मामले में शासन से 4 लाख रुपए का मुआवजा हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। जांच में यह बात सामने आई कि महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी, सह-आरोपी कामता साहू ने सामान्य मौत को सर्पदंश बताया था। इस पर इनके खिलाफ बिल्हा थाने में मामला भी दर्ज है।

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