छत्तीसगढ़

दुर्ग नगर निगम ने गुरुवार सुबह बोरसी भाठा क्षेत्र में दुर्ग-बालोद रेलवे लाइन किनारे अतिक्रमणों पर कार्रवाई की गई

15 अगस्त विज्ञापन

दुर्ग नगर निगम ने गुरुवार सुबह बोरसी भाठा क्षेत्र में दुर्ग-बालोद रेलवे लाइन किनारे अतिक्रमणों पर कार्रवाई की गई। हाईकोर्ट के आदेश के पालन में चार दुकानों को ध्वस्त किया गया। इस दौरान भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

कार्रवाई शुरू करने से पहले नगर निगम की टीम ने अतिक्रमण स्थलों पर नोटिस चस्पा किए। इसके बाद जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल कर अवैध निर्माणों को हटाया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई है।

यह कार्रवाई एसडीएम कोर्ट में अपील खारिज होने के बाद संभव हुई। पहले एसडीएम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसके खिलाफ प्रभावित पक्षों ने अपील दायर की थी। लगभग एक सप्ताह पहले एसडीएम न्यायालय ने इन अपीलों को खारिज कर दिया।

सुबह से तैनात रहा भारी पुलिस बल

वहीं, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुबह करीब 5 बजे से ही भारी पुलिस बल मौके पर तैनात था। कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर, नगर निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल, एसडीएम कार्यालय के अधिकारी और तहसीलदार वीरेंद्र सिंह सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

37 निर्माण हटाने का आदेश, 33 को मिली राहत

अधिकारियों के अनुसार, हाईकोर्ट ने कुल 37 दुकानों और मकानों को हटाने का आदेश दिया था। हालांकि, इनमें से 33 प्रभावित पक्षों ने न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त कर लिया है। इस कारण फिलहाल उन स्थानों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की जा सकी।

बिना स्टे वाले चार निर्माणों पर कार्रवाई

चार ऐसे निर्माण थे जिनके पास किसी प्रकार का स्थगन आदेश नहीं था। इसी वजह से नगर निगम ने उन्हीं चार दुकानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की। बाकी मामलों में न्यायालय के आगामी निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अवैध कब्जों पर आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

प्रशासन का कहना है कि जिन मामलों में न्यायालय से राहत नहीं मिली है, वहां नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि और रेलवे लाइन से लगे क्षेत्रों में अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।

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