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अंबिकापुर गुदरी चौक: लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के बाहर ट्रांसफार्मर विवाद में हिंसक झड़प, भारी हंगामा

Ambikapur Gudri Chowk: Violent clashes outside Laxmi Narayan Hospital over transformer dispute, leading to massive uproar

15 अगस्त विज्ञापन

सरगुजा /अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर के गुदरी चौक स्थित लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के बाहर भारी हंगामे और हिंसा के नाम रहा। अस्पताल परिसर के पास लगे एक विद्युत ट्रांसफार्मर को हटाने की मांग देर शाम तक हिंसक झड़प में बदल गई। नाराज मोहल्लेवासी सुबह से ही अस्पताल के बाहर एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शाम होते-होते यह शांतिपूर्ण विरोध हिंसक रूप धारण कर लिया। शहर की कानून-व्यवस्था की पोल खोलने वाली इस घटना ने स्थानीय प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विवाद की जड़ अस्पताल के मुख्य द्वार के ठीक सामने लगा ट्रांसफार्मर है, जो सड़क किनारे खड़ा होने से सुरक्षा का खतरा पैदा कर रहा था। विजय मार्ग नामक यह सड़क महज 20 फीट चौड़ी है, जहां दिनभर मरीजों की गाड़ियां, राहगीर और वाहन जाम की स्थिति बनाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ट्रांसफार्मर से बार-बार स्पार्किंग होती है, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। कुछ महीने पहले इसी इलाके में गीता प्रिंटिंग प्रेस में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने सबको सतर्क कर दिया था।

सुबह करीब 9 बजे मोहल्लेवासी एकत्रित हुए और अस्पताल प्रबंधन से ट्रांसफार्मर हटाने की मांग करने लगे। शुरू में बातचीत का माहौल था, लेकिन दोपहर होते-होते तनाव बढ़ गया। अस्पताल ने अपनी नर्सों को बाहर खड़ा करवाया, जिससे कहासुनी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने बिना अनुमति के ट्रांसफार्मर लगाया है, जो नियमों के विरुद्ध है। बिजली विभाग को पूर्व में शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

करीब तीन दर्जन लोगों ने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन तैयार किया और नगर निगम, कलेक्टर, एसपी को सौंपने की तैयारी की। लेकिन शाम 5 बजे हंगामा चरम पर पहुंच गया। गुस्साए लोगों ने अस्पताल की डॉक्टर की गाड़ी पर तोड़फोड़ की, जबकि एक स्थानीय पत्रकार के साथ मारपीट हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिखा कि भीड़ भड़क चुकी थी और पुलिस को भारी बल के साथ उतारना पड़ा।

शाम 7 बजे एडिशनल एसपी डॉ. अभिषेक मीणा, सीएसपीडीसीएल अधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। विद्युत विभाग ने तुरंत ट्रांसफार्मर की बिजली काट दी, जिससे तात्कालिक राहत मिली। थाने में दोनों पक्षों की शिकायत दर्ज हुई। अस्पताल प्रबंधन ने खुद को बेकसूर बताया, लेकिन स्थानीयों ने अवैध निर्माण का हवाला दिया। नगर निगम ने पहले ही अस्पताल के कुछ हिस्सों को तोड़ने का आदेश जारी कर चुका है।

मोहल्लेवासियों की मुख्य मांगें साफ हैं—ट्रांसफार्मर को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए, अस्पताल का अवैध हिस्सा ढहाया जाए और जाम की समस्या का समाधान हो। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे ऐसा उपकरण लगाना घोर लापरवाही है। बिजली कंपनी के असिस्टेंट इंजीनियर कैलाश देवांगन से बात नहीं बन पाई। ज्ञापन में नगर निगम को चेतावनी दी गई कि यदि कार्रवाई न हुई तो आंदोलन तेज होगा।

अस्पताल पक्ष का तर्क है कि ट्रांसफार्मर उनकी बिजली जरूरत के लिए आवश्यक है, लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ। पूर्व में स्वास्थ्य विभाग ने पार्किंग व्यवस्था पर जांच की थी, पर कोई सख्ती नहीं बरती। यह भवन मूल रूप से ‘खरे कॉम्प्लेक्स’ नामक आवासीय परिसर था, जिसे बिना मंजूरी के अस्पताल बना दिया गया। स्थानीय व्यापारी भी जाम से त्रस्त हैं और समर्थन दे रहे हैं।

पुलिस ने पूरे दिन भारी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। एडिशनल एसपी ने समझाइश दी और मामला शांत किया। लेकिन घटना ने शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें पत्रकार पर हमला और तोड़फोड़ साफ दिख रही है। स्थानीय पत्रकार संगठन ने सुरक्षा की मांग की है।

नगर निगम अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अवैध निर्माण पर अमल होगा। बिजली विभाग ट्रांसफार्मर हटाने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सकरी गलियों में ऐसी सुविधाएं खतरा हैं। पूर्व आग की घटना ने सबक दिया कि सुरक्षा पहले आती है। प्रशासन ने शांतिपूर्ण समाधान का वादा किया है।

यह घटना अंबिकापुर जैसे छोटे शहर में बुनियादी सुविधाओं की लापरवाही को उजागर करती है। यदि समय रहते शिकायतों पर अमल होता तो हिंसा न होती। स्थानीय नेता मामले को विधानसभा में उठाने की बात कर रहे हैं। शहरवासी उम्मीद कर रहे कि ऐसी घटनाएं न हों और प्रशासन सक्रिय हो। भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए नियम सख्त करने की जरूरत है।

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