99 दफ्तरों ने एडवांस नहीं दिया:प्रीपेड मीटर योजना तीसरी बार टली, 20,577 सरकारी कनेक्शनों पर 800 करोड़ बकाया
सरकारी दफ्तरों के स्मार्ट मीटर एक अगस्त से प्रीपेड नहीं हो सके। बिजली कंपनी ने 100 शासकीय दफ्तरों को तीन महीने के औसत बिल के बराबर एडवांस जमा करने के निर्देश दिए थे। इनमें सिर्फ क्रेडा ने राशि जमा की। बाकी 99 विभागों ने न एडवांस दिया, न कंपनी के पत्र का जवाब। सहयोग नहीं मिलने से योजना एक बार फिर टल गई। बिजली कंपनी के मुताबिक, बिलासपुर संभाग में सरकारी विभागों के 20,577 बिजली कनेक्शन हैं। इन पर एक साल का 800.02 करोड़ रुपए का बिल बकाया है। इसमें से 757.40 करोड़ रुपए सिर्फ 10 विभागों पर बाकी हैं। अन्य 90 विभागों का बकाया करीब 42.62 करोड़ रुपए है। ग्राम पंचायतें 291.47 करोड़ रुपए के साथ सबसे बड़ी बकायेदार हैं। नगर निगमों पर भी 258.70 करोड़ रुपए बाकी हैं। केंद्र सरकार की शर्तों के तहत पहले चरण में ब्लॉक से लेकर उच्च स्तर तक के सभी सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड बिलिंग लागू की जानी है। इसके लिए एक अगस्त तक एडवांस जमा करना था। तय समय में सिर्फ क्रेडा से राशि मिलने के कारण बिजली कंपनी योजना शुरू नहीं कर सकी। सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड मीटर की योजना पहले भी दो बार टल चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, तब उच्च स्तर पर सहमति नहीं बन सकी थी। इस बार केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की शर्तें पूरी नहीं होने से छत्तीसगढ़ को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान की एक-तिहाई राशि रुक गई है। इसके बाद बिजली कंपनी ने प्रक्रिया तेज की, लेकिन सरकारी विभागों से सहयोग नहीं मिला। घरों में ही हो रहा विरोध, अभी 40 हजार मीटर लगना बाकी इधर, शहर में घरों और दुकानों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों का विरोध जारी है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर बदलने के बाद बिल तीन से चार गुना तक बढ़ गया। कुछ मोहल्लों में लोगों ने मीटर लगाने पहुंची टीमों को लौटा दिया। बिजली कंपनी के अनुसार, 50 से ज्यादा उपभोक्ताओं ने 500 रुपए शुल्क देकर मीटरों की लैब जांच कराई। सभी मीटर तकनीकी रूप से सही मिले। इसके बाद भी उपभोक्ताओं का भरोसा नहीं बढ़ा है। शहर में अब तक करीब 1.05 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। करीब 40 हजार मीटर अभी बाकी हैं। ईडी ए.के. अंबस्थ ने बताया कि मीटर लगाने की रफ्तार कम हुई है, लेकिन कर्मचारियों को लौटाने की कोई सूचना नहीं है।




