41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या: लहर गंगा और ओडिसी नृत्यांगना दीक्षा रथ की प्रस्तुतियों ने मोहा मन


रायगढ़ में 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक सांस्कृतिक संस्था ‘लहर गंगा’ ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों को प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं से रूबरू कराया। लोक नृत्य और गीतों से सजा छत्तीसगढ़ी रंग मंगलवार को ‘लहर गंगा’ की प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के लोक जीवन के अलग-अलग रंग देखने को मिले।
कलाकारों ने गौरी-गौरा, जस जंवारा, पंथी, पंडवानी, राऊत नाचा, सुवा, कर्मा और ददरिया जैसी पारंपरिक लोक विधाओं की मनोहारी झलक प्रस्तुत की। अलग-अलग लोक नृत्यों और गीतों के माध्यम से कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति में प्रदेश की मिट्टी की खुशबू, लोक जीवन की सहजता और पारंपरिक कलाओं की विविधता एक साथ नजर आई। कलाकारों के ऊर्जा से भरे मंचीय प्रदर्शन पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। प्रस्तुति के दौरान छत्तीस दलों वाला पुष्प कमल भी खास आकर्षण का केंद्र रहा।
बालोद जिले के धनेली स्थित लोक कला ग्राम से जुड़ी ‘लहर गंगा’ लंबे समय से छत्तीसगढ़ की लोक सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और मंचीय रूप में प्रस्तुत करने का काम कर रही है। संस्था की प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्यप्रदेश, असम, बिहार और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में हो चुकी हैं।
इसी सांस्कृतिक संध्या में अंतर्राष्ट्रीय ओडिसी नृत्यांगना कुमारी दीक्षा रथ ने दो मनोहारी प्रस्तुतियों से मंच पर भक्ति, भाव और शक्ति के विविध रंग बिखेरे। पहली प्रस्तुति में उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को साकार किया। नटखट बाल कृष्ण, वात्सल्य भाव, मधुर बांसुरी और दिव्य स्वरूप को भाव-भंगिमाओं और नृत्य मुद्राओं के जरिए जीवंत किया गया। राग मिश्र मुखारी और रूपक ताल पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को कृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी दर्शन कराया।
इसके बाद ‘दुर्गा ताण्डव’ की ओजस्वी प्रस्तुति हुई। इसमें अंधकार से शक्ति के उदय, नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूप, सिंहवाहिनी मां दुर्गा, ताण्डव और अधर्म पर विजय के भावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। महिषासुरमर्दिनी स्वरूप के माध्यम से सत्य और धर्म की विजय का संदेश दिया गया। प्रस्तुति के अंत में मां के शांत और करुणामयी स्वरूप ने इसे भावपूर्ण विराम दिया।
कार्यक्रम में बाल कलाकार मानवी अग्रवाल (8) ने कथक की सुंदर प्रस्तुति दी। वह महज 4 वर्ष की उम्र से तब्बू परवीन के मार्गदर्शन में कथक सीख रही हैं। मानवी ने अपनी ऊर्जा, ताल और भावपूर्ण नृत्य से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मानवी कथक के साथ हूला हूप डांसिंग में भी निपुण हैं। वह चक्रधर समारोह, राज्योत्सव और प्रणवम् राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव समेत विभिन्न मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत कर चुकी हैं।




