रायपुर

1.60 लाख शिक्षकों को झटका: पेंशन के लिए 2018 से गिनी जाएगी सेवा, पहली नियुक्ति से नहीं

15 अगस्त विज्ञापन

छत्तीसगढ़ सरकार ने 1.60 लाख शिक्षकों (एलबी संवर्ग) की पेंशन के लिए सेवा गणना का आधार 1 जुलाई 2018 को माना है। पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा जोड़ने की मांग खारिज कर दी गई है। हाई कोर्ट ने सरकार को उचित फैसला लेने को कहा था, लेकिन सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि 2018 से पहले वे पंचायत/नगरीय निकाय के कर्मचारी थे, इसलिए उस अवधि को शासकीय सेवा नहीं माना जा सकता।

<p>छत्तीसगढ़ के करीब 1.60 लाख शिक्षकों (एलबी संवर्ग) के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि पेंशन और दूसरे सेवा लाभों की गणना शिक्षाकर्मी के रूप में पहली नियुक्ति की तारीख से नहीं होगी। इसके लिए 1 जुलाई 2018 को ही आधार माना जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर शिक्षकों की मांग को खारिज कर दिया है।</p><h3>पूरा मामला</h3><p>छत्तीसगढ़ में पहले कई शिक्षक शिक्षाकर्मी के रूप में पंचायत और नगरीय निकायों के तहत काम करते थे। बाद में सरकार ने उनका 1 जुलाई 2018 को स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन (सरकारी विभाग में शामिल) किया। कुछ शिक्षकों की मांग थी कि पेंशन और दूसरी सुविधाओं के लिए उनकी सेवा की गिनती पहली नियुक्ति की तारीख से की जाए, क्योंकि वे उससे पहले भी कई साल नौकरी कर चुके थे।</p><h3>सरकार का आदेश</h3><p>सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि 1 जुलाई 2018 से पहले शिक्षक पंचायत और नगरीय निकाय के कर्मचारी थे, सीधे राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं। इसलिए उस अवधि को शासकीय सेवा मानकर पेंशन की गणना नहीं की जा सकती।</p><h3>उदाहरण से समझिए</h3><p>उदाहरण-1: किसी शिक्षक की शिक्षाकर्मी के रूप में नियुक्ति 2008 में हुई। उनका संविलियन 1 जुलाई 2018 को हुआ। यदि वे 2038 में रिटायर होते हैं, तो सरकार उनकी पेंशन के लिए सेवा 2008 से नहीं, बल्कि 2018 से मानेगी। यानी 30 साल नहीं, 20 साल की सरकारी सेवा मानी जाएगी।</p><p>उदाहरण-2: दो शिक्षक हैं— शिक्षक A की नियुक्ति 2007 में शिक्षाकर्मी के रूप में हुई, शिक्षक B की नियुक्ति 2010 में हुई। दोनों का संविलियन 1 जुलाई 2018 को हुआ। सरकार के नए फैसले के मुताबिक, दोनों की सरकारी सेवा की शुरुआत 1 जुलाई 2018 से ही मानी जाएगी।</p><h3>हाई कोर्ट का रुख</h3><p>यह मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में पहुंचा था। शिक्षकों ने मांग की थी कि उनकी सेवा पहली नियुक्ति से जोड़ी जाए। 23 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह मामले पर संवैधानिक और मानवीय पहलुओं को देखते हुए उचित फैसला ले। इसके बाद सरकार ने अपना निर्णय जारी करते हुए मांग खारिज कर दी।</p><h3>आगे की संभावना</h3><p>इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है, जो चाहते थे कि उनकी पूरी नौकरी की अवधि पेंशन में जोड़ी जाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने पहले ही कहा था कि यदि शिक्षक सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे फिर से अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। ऐसे में इस मामले पर आगे कानूनी लड़ाई की संभावना बनी हुई है।</p>

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