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यूथ गेम्स में बड़ी लापरवाही, खिलाड़ियों को अंधेरे में बांटे पुरस्कार, बच्चों की घर वापसी के लिए नहीं थे वाहन

15 अगस्त विज्ञापन


Khelo MP Youth Games: खेलो इंडिया-खेलो एमपी यूथ गेम्स 2025-26 के तहत राजगढ़ के उत्कृष्ट विद्यालय खेल मैदान पर आयोजित किया गया कार्यक्रम अव्यवस्थाओं से …और पढ़ें

Publish Date: Tue, 20 Jan 2026 10:40:39 AM (IST)Updated Date: Tue, 20 Jan 2026 10:40:39 AM (IST)

खिलाड़ियों को अंधेरे में बांटे पुरस्कार।

HighLights

  1. राजगढ़ में खेल आयोजन बना औपचारिकता।
  2. टॉर्च की रोशनी में बांटे गए पुरस्कार।
  3. बच्चों की घर वापसी के लिए नहीं थे वाहन।

नईदुनिया प्रतिनिधि, राजगढ़। खेलो इंडिया-खेलो एमपी यूथ गेम्स 2025-26 के तहत राजगढ़ के उत्कृष्ट विद्यालय खेल मैदान पर आयोजित किया गया कार्यक्रम अव्यवस्थाओं से घिरा नजर आया। यहां पर शाम के लिए प्रकाश की व्यवस्था नहीं की गईं, जिसके कारण अंधेरे में मोबाइल व टॉर्च की रोशनी में पुरस्कार बांटे गए।

बच्चों को घरों के लिए लौटने के लिए वाहनों के इंतजाम भी नहीं किए गए थे, जिससे दूर-दराज से आए बच्चे परेशान होते रहे। उल्लेखनीय है कि सोमवार को उत्कृष्ट स्कूल के खेल मैदान पर खेलो इंडिया-खेलो एमपी यूथ गेम्स 2025-26 का आयोजन किया गया थाकार्यक्रम में नरसिंहगढ़। खिलचीपुर, पचोर, जीरापुर सहित दूर-दराज क्षेत्रों से बच्चे पहुंचे थे।

कई निजी स्कूलों के माध्यम से आए अधिकांश बच्चे दोपहर बाद स्कूल वाहनों से लौट गए, लेकिन कार्यक्रम देर शाम तक चलता रहा, जिसके कारण बच्चों को समय पर वाहन नहीं मिल सके और वे देर तक मैदान में भटकते रहे। बच्चों के लिए देर शाम को वाहनों का इंतजाम नहीं किया, जिससे वह परेशान होते रहे।

मैदान में दूर-दूर तक बच्चों की भीड़ लगी रही। कई खिलाड़ी थके-हारे थे, जिन्हें समय पर नाश्ता और चाय तक उपलब्ध नहीं कराया गया। खेल एवं युवक कल्याण विभाग ने इसे महज औपचारिकता बना दिया।

उधर कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार तोलानी मौजूद रहे। उन्होंने अंधेरे के बीच ही विजेता खिलाडियों को पुरस्कार प्रदान किए। मोबाइल की लाइट व टार्च आदि के प्रकाश का सहारा लेना पड़ा।

परिसर में न तो पर्याप्त रोशनी थी और न ही बैठने या बच्चों की सुविधा का उचित इंतजाम। शाम सात बजे तक अंधेरे में पुरस्कार वितरण होता रहा। इसके बाद भी बच्चों की घर वापसी की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसके बाद स्थानीय थानेदार को निजी स्कूल संचालकों को फोन कर वाहनों की व्यवस्था के लिए कहना पड़ा। तब जाकर बच्चों को राहत मिल सकी।

अतिरिक्त फंड के बावजूद नहीं की व्यवस्थाएं

खेलों को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाता है, इसके बावजूद खिलाडियों के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। खेल एवं युवक कल्याण विभाग की लापरवाही के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ।



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