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विवाह की वैधता का प्रकरण लंबित रहने से पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकताः छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

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हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शादी की वैधता को चुनौती देने वाले मामले के लंबित रहने से पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता।

Publish Date: Fri, 31 Jul 2026 07:09:13 PM (IST)Updated Date: Fri, 31 Jul 2026 07:10:43 PM (IST)

HighLights

  1. आरोप पत्नी ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाई
  2. महिला ने बेटी के लिए भरण-पोषण की अर्जी दी थी
  3. कोर्ट ने कहा कि शादी की वैधता का फैसला अलग से होगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शादी की वैधता को चुनौती देने वाले मामले के लंबित रहने से पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय भिलाई निवासी पति गोपाल गोपवानी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए दिया गया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने भिलाई परिवार अदालत द्वारा पत्नी पूजा गोपवानी के पक्ष में निर्धारित 15 हजार रुपये प्रतिमाह के भरण-पोषण को यथावत रखा।

आरोप पत्नी ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाई

कोर्ट ने कहा कि शादी की वैधता का फैसला अलग से होगा, लेकिन इससे पत्नी के भरण-पोषण की आवश्यकता पर निर्णय नहीं रोका जा सकता। पति ने भरण-पोषण राशि को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि पत्नी ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाई थी। इस आधार पर उसने परिवार अदालत में अलग से सिविल मुकदमा दायर किया है।

बेटी के लिए भरण-पोषण की अर्जी दी थी

भिलाई के वैशाली नगर निवासी पूजा गोपवानी ने अपनी और अपनी 11 वर्षीय बेटी के लिए भरण-पोषण की अर्जी दी थी। परिवार अदालत ने पहले तीन हजार रुपये प्रतिमाह की अंतरिम राशि को बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया। हाई कोर्ट ने पति की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य जरूरतमंद पत्नी और बच्चों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

कोर्ट ने परिवार अदालत के आदेश की समीक्षा करते हुए पाया कि भरण-पोषण की राशि दोनों पक्षों की आय और आर्थिक स्थिति के आधार पर तय की गई थी।

अनुकंपा नियुक्ति की अर्जी पर नए सिरे से लें फैसला: कोर्ट

हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राज्य शासन के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें आवेदक की नियुक्ति संबंधी अर्जी निरस्त कर दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पर विचार करते समय कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नीति को आधार नहीं बनाया जा सकता।

मध्य प्रदेश के सागर जिले के खुरई निवासी आयुष सिंह कुर्मी ने अधिवक्ता एसपी काले के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनके पिता स्वर्गीय बलराम सिंह कुर्मी जल संसाधन विभाग में कार्यरत थे। पिता की मृत्यु के बाद आयुष ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, जिसे जल संसाधन विभाग ने 28 मार्च 2018 को निरस्त कर दिया था। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकलपीठ में हुई।



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