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UP: पांच वर्षों में 466 लापता परिवार से मिले, आधार कार्ड बना जरिया,  सबसे अधिक वाराणसी के लोग शामिल

15 अगस्त विज्ञापन


आधार कार्ड अपनों से बिछड़े लोगों को मिलान का जरिया बन गया। ऐसे लोग जो मानसिक रूप से कमजोर थे या फिर वह बच्चे जिनकी उम्र कम थी और घर से दूर हो गए थे। वह न तो परिजनों के बारे में कुछ जानकारी दे पा रहे थे और न ही पता बता पा रहे थे। ऐसे लोगों के लिए आधार कार्ड बेहद कारगर साबित हुआ।

पिछले पांच वर्षों में 466 खोए हुए लोगों को आधार की मदद से उनके परिवार तक पहुंचाया गया। यूआईडीएआई के उपमहानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि शेल्टर होम, बालगृहों व अन्य आश्रय केंद्रों पर आधार कैंप लगाए जाते हैं। पांच साल के ऊपर वालों का आधार बनाने की प्रक्रिया की जाती है। इसमें उनका रिजेक्ट हो जाता है जिनका आधार पहले से बना होता है। तब उसके आधार की डिटेल निकाली जाती है। जिससे उसका नाम, पता व मोबाइल नंबर मिल जाता है। तब आसानी से उनको उनके परिवार तक पहुंचाया जा सकता है।

जरूर अपडेट कराएं बच्चों का आधार

पांच साल से पहले जिन बच्चों का आधार कार्ड बनता है उसमें सिर्फ उसकी फोटो क्लिक की जाती है। पांच पूरा होने के बाद उनका बायोमीट्रिक लिया जाता है। अपडेट होने से पूरा विवरण आसानी से मिल जाता है।  उपमहानिदेशक ने बताया कि जिन बच्चों की उम्र पांच साल पूरी हो चुकी है उनका आधार जरूर अपडेट कराएं। इसमें लापरवाही न बरतें। 

सबसे अधिक वाराणसी से पहुंचाए गए लोग

वर्ष 2019 में 2 लोगों को आधार के जरिये उनके परिवारीजनों तक पहुंचाया गया। इसी तरह वर्ष 2020-21 में 95, वर्ष 2022 में 48, वर्ष 2023 में 46, वर्ष 2024 में 152 और 2025 में 123 बिछड़े लोगों को मिलाया गया। इसमें सबसे अधिक 125 लोग वाराणसी के शेल्टर होम के थे। लखनऊ के 56 लोग शामिल हैं, जिनके परिजनों की तलाश कर ली गई।



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