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सुकमा: 22 माओवादियों का आत्मसमर्पण, महिला नक्सली समेत हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटे

Sukma: 22 Maoists surrender, including a female Naxalite who has renounced violence and returned to the mainstream.

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सुकमा, 17 फरवरी 2026 : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से नक्सल उन्मूलन अभियान को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। मंगलवार को 22 सक्रिय माओवादियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें एक महिला नक्सली भी शामिल है। सभी ने लंबे समय तक हिंसा का रास्ता अपनाए रखने के बाद मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। यह घटना सुरक्षा बलों और जिला प्रशासन की आत्मसमर्पण नीति की सफलता का प्रतीक मानी जा रही है, जो नक्सलियों को हिंसा त्यागने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

आत्मसमर्पण समारोह सुकमा जिला पुलिस मुख्यालय में आयोजित किया गया, जहां एसपी सुकमा संजीव शर्मा, आईजी बस्तर क्षेत्र कमल सिंह राठौर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आत्मसमर्पण करने वालों में विभिन्न स्तर के कैडर शामिल हैं। इनमें डीजीएम (डिविजनल ग्रेनेड मैन्युफैक्चरर), एलओएस (लोकल ऑर्गनाइजेशनल स्क्वायड) के सदस्य, बीटीएस (बटालियन ट्रेनिंग स्क्वायड) के सदस्य और एरिया कमेटी के सदस्य प्रमुख हैं। सबसे उल्लेखनीय एक महिला नक्सली है, जो पिछले 8 वर्षों से सक्रिय थी। उसने कांकेर क्षेत्र में कई संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लिया था।

एक आत्मसमर्पित नक्सली ने बताया, “हमने माओवादी संगठन के झूठे वादों पर भरोसा किया। लंबे समय तक जंगलों में भटकने, भूखे-प्यासे रहने और हमेशा पुलिस का डर सताने से तंग आ चुके थे। अब मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जिएंगे।” आत्मसमर्पण करने वालों ने 15 से अधिक सेल्फ लोडेड राइफलें, एसएलआर, 315 बोर राइफलें, ग्रेनेड लांचर, आईईडी और अन्य हथियार जमा किए। इनका मूल्य करोड़ों रुपये बताया जा रहा है।

सुकमा एसपी संजीव शर्मा ने कहा, “यह आत्मसमर्पण नक्सल उन्मूलन अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारी आत्मसमर्पण नीति ने नक्सलियों को हिंसा का खामियाजा समझाने में सफलता दिखाई। केंद्र और राज्य सरकार की ‘नक्सली छोड़ो हिंसा, लौटो मुख्यधारा’ योजना के तहत इनका पुनर्वास किया जाएगा।” आत्मसमर्पित नक्सलियों को अब 3 महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें कौशल विकास, सिलाई, ड्राइविंग और अन्य व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल है। इसके बाद उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

यह घटना छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की लगातार सफलता का हिस्सा है। पिछले एक वर्ष में बस्तर क्षेत्र में 500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सुकमा जिले में विशेष रूप से सफलता मिली है, जहां अब तक 100 से अधिक कैडर सरेंडर कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आत्मसमर्पण श्रृंखला संगठन की कमजोर होती कमर को दर्शाता है। नक्सली नेतृत्व में भटकाव बढ़ रहा है और निचले स्तर के कैडर थक चुके हैं।

जिला प्रशासन ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए पुनर्वास पैकेज तैयार किया है। इसमें 2.5 लाख रुपये की सहायता, आवास, कृषि उपकरण और परिवार कल्याण योजनाओं का लाभ शामिल है। महिला नक्सली को विशेष पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा। स्थानीय आदिवासी समुदाय ने इस कदम का स्वागत किया है। एक ग्रामीण ने कहा, “ये लोग हमारे बीच ही रहते थे। अब शांति से जीवन जिएंगे।”

नक्सल उन्मूलन अभियान में ड्रोन, हेलीकॉप्टर और आईईडी डिटेक्टर जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग बढ़ा है। साथ ही विकास कार्यों से ग्रामीणों का विश्वास जीता जा रहा है। सुकमा में सड़कें, स्कूल, अस्पताल और मोबाइल टावर बन रहे हैं। नक्सलियों का आत्मसमर्पण इसी का परिणाम है। भविष्य में और बड़े आत्मसमर्पण की उम्मीद है। यह घटना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए नई आशा का संदेश देती है।

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