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सरगुजा: कब्र से निकाला गया युवक का शव, परिवार ने हत्या और पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया

15 अगस्त विज्ञापन

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में महामाया पहाड़ पर मिले क्षत-विक्षत शव की पहचान शुभम कश्यप (33) के रूप में हुई है। पहले शव को दफना दिया गया था, लेकिन पहचान के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्र खोदकर शव निकाला गया। शुभम के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसकी हत्या कर शव को फंदे से लटकाया गया था। उन्होंने पुलिस पर गुमशुदगी की जांच में लापरवाही बरतने और बदसलूकी करने का भी आरोप लगाया। परिवार ने फिरौती के मैसेज की जानकारी पुलिस को देने का भी दावा किया है, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां महामाया पहाड़ पर शनिवार को मिले एक क्षत-विक्षत शव की पहचान शुभम कश्यप (33) के रूप में हुई है। शुभम जयस्तंभ चौक के पास मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता था। शुरुआती तौर पर शव की पहचान न होने के कारण उसे दफना दिया गया था। हालांकि, पहचान होने के बाद सोमवार को पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में कब्र खुदवाकर शव को बाहर निकाला और शुभम के रिश्तेदारों को सौंपा।

शुभम के परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शुभम की हत्या कर उसके शव को फांसी पर लटकाया गया था। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने शुभम की गुमशुदगी की जांच में घोर लापरवाही बरती और उनके साथ बदसलूकी की। रिश्तेदारों ने बताया कि 3 दिन पहले शुभम की मां के मोबाइल पर एक मैसेज आया था, जिसमें लिखा था कि शुभम एक लड़की के पास है और उसे वापस लाने के लिए 1 लाख रुपये की व्यवस्था करनी होगी। परिवार का दावा है कि उन्होंने इस मैसेज की जानकारी पुलिस को दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे फर्जी बताकर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की।

मामले की शुरुआत तब हुई जब शनिवार को महामाया पहाड़ स्थित सागौन नर्सरी में एक क्षत-विक्षत शव मिला। मौके पर साड़ी और महिलाओं की चप्पलें मिलने के कारण शुरुआत में शव को युवती का माना गया। हालांकि, फॉरेंसिक जांच और पोस्टमॉर्टम के बाद यह स्पष्ट हुआ कि शव एक युवक का था। शव के साथ मिले सामान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रविवार शाम शुभम कश्यप के रिश्तेदार कोतवाली थाने पहुंचे। उन्होंने चप्पल और कपड़ों के आधार पर शव की पहचान शुभम के रूप में की।

रिश्तेदारों का आरोप है कि शुभम की गुमशुदगी की रिपोर्ट 11 जुलाई को कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने न तो उसकी तलाश में गंभीरता दिखाई और न ही शव मिलने की जानकारी परिवार को दी। परिवार ने यह भी दावा किया कि शुभम नशे का आदी था और 10 जुलाई को नशे की हालत में घर पहुंचने पर हुए विवाद के बाद उसे कोतवाली थाने ले जाया गया था। वहां से वह मामा के घर चला गया और 11 जुलाई की सुबह घर लौटकर कुछ सामान लेकर निकला, जिसके बाद वह वापस नहीं आया। उनका कहना है कि जिस पेड़ पर शव मिलने की बात कही जा रही है, वह इतना मजबूत नहीं था कि शव का भार संभाल सके।

पुलिस पर बदसलूकी का भी आरोप लगा है। रविवार को पहचान के लिए थाने पहुंचे रिश्तेदारों ने बताया कि वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें बाहर जाने के लिए कहा। मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी थाने पहुंचकर नाराजगी जताई थी।

इस संबंध में, एएसपी अमोलक सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शुभम का मोबाइल और पर्स अभी तक बरामद नहीं हुआ है। यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है और पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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