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सरदार अजीत सिंह भोगल के नेतृत्व में निगम आयुक्त को ज्ञापन: चौक की पवित्रता बहाल करने की मांग

15 अगस्त विज्ञापन

गौरी शंकर गुप्ता/बिलासपुर। तोरवा नाका स्थित श्री गुरु नानक देव जी चौक की लगातार हो रही अनदेखी और दुर्दशा को लेकर पूरे सिख समाज में भारी आक्रोश और नाराजगी व्याप्त है। आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर हो रहे अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए श्री गुरु तेग बहादुर शिक्षण समिति के अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह भोगल के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नगर पालिक निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।

आस्था के केंद्र पर अवैध दुकानें और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा

सिख समाज द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तोरवा नाका स्थित यह चौक सिखों के प्रथम गुरु, जगत गुरु श्री गुरु नानक देव जी के पावन नाम पर स्थापित है, जो समस्त समाज के लिए अगाध श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। हालांकि, नगर निगम की उपेक्षा और देख-रेख के अभाव के कारण यह स्थल गंदगी और अवैध कब्जों का केंद्र बन चुका है।

चौक के परिसर के भीतर और आसपास अवैध रूप से पान ठेले, फल की दुकानें और ऑटो स्टैंड संचालित हो रहे हैं। इतना ही नहीं, शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों द्वारा यहां खुलेआम शराब पीकर डिस्पोजल गिलास फेंकने और पान थूककर स्थल को गंदा करने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।

सिख समाज ने निगम प्रशासन के समक्ष रखीं 3 प्रमुख मांगें

अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह भोगल ने निगम प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए तीन मुख्य मांगें रखी हैं:

अतिक्रमण पर तुरंत कार्रवाई: चौक के भीतर और आसपास से सभी अवैध दुकानों, पान ठेलों और ऑटो स्टैंड को तत्काल हटाया जाए।

सौंदर्यीकरण और सुरक्षा: चौक का उचित रखरखाव करते हुए इसका जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कराया जाए ताकि इसकी धार्मिक गरिमा बनी रहे।

सम्मानजनक स्थानांतरण: यदि वर्तमान स्थान पर सुरक्षा और पवित्रता बनाए रखना संभव नहीं है, तो इस चौक को शहर के किसी अन्य गरिमापूर्ण और सम्मानजनक स्थान पर स्थापित किया जाए।

शीघ्र समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन की प्रतिलिपि जोन कमिश्नर (जोन क्र. 6) को भी प्रेषित की है। सिख समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने समय रहते चौक की सुरक्षा, सफाई और सौंदर्यीकरण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो पूरा सिख समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

15 अगस्त विज्ञापन
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