छत्तीसगढ़

सोयाबीन बोनी के लिए कृषि विश्वविद्यालय की गाइडलाइन: कतार बोनी और बीजोपचार से बढ़ेगी पैदावार

15 अगस्त विज्ञापन

रायपुर, जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों को सोयाबीन की खेती से बम्पर पैदावार दिलाने और उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा राज्य स्तरीय कृषि निर्देशिका जारी की गई है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के मौसम को देखते हुए किसानों को सही समय पर और वैज्ञानिक पद्धति से बोनी कार्य पूर्ण करने की सलाह दी है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में घने बादल छाए रहने के साथ ही हल्की से मध्यम वर्षा होने की पूरी संभावना है। इस अनुकूल मौसम को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने कृषकों को तत्काल खेतों में सोयाबीन की सीधी बुवाई और कतार बोनी का कार्य शुरू करने की सलाह दी है।

वैज्ञानिकों ने उन्नत और समृद्ध खेती के गुर साझा करते हुए कहा है कि सोयाबीन की भरपूर फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 65 से 75 किलोग्राम बीज दर का उपयोग करना सबसे उपयुक्त होता है। बेहतर फसल प्रबंधन और कतारों की सुगमता के लिए बुवाई हमेशा कतारों (पंक्तियों) में ही की जानी चाहिए, जिसमें कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 7 से 10 सेंटीमीटर रखना अनिवार्य है। इसके साथ ही फसल को शुरुआती दौर में कीटों एवं रोगों से सुरक्षित रखने के लिए बीजोपचार को सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया है। किसानों को कहा गया है कि वे राइजोबियम कल्चर 5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज तथा पी.एस.बी. 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से अच्छी तरह उपचारित करने के बाद ही बुवाई संपन्न करें।

इसके अलावा, भूमि की सेहत और पौधों के समुचित पोषण के लिए विश्वविद्यालय ने संतुलित उर्वरक मात्रा की अनुशंसा की है।, वैज्ञानिकों ने बताया है कि किसानों को प्रति हेक्टेयर 20 से 25 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन), 60 से 80 किलोग्राम स्फुर (फास्फोरस) तथा 30 से 40 किलोग्राम पोटाश की निर्धारित मात्रा का ही प्रयोग करना चाहिए।

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