रायपुर में 30 साल पुराने घोटाले में EOW का बड़ा एक्शन, 15 हजार पन्नों का चालान पेश, ₹1.86 करोड़ अब बना 104 करोड़

EOW के मुताबिक वर्ष 1995-98 में लिया गया 1.86 करोड़ रुपये का फर्जी गृह निर्माण ऋण, 31 दिसंबर 2025 तक मूलधन और ब्याज मिलाकर 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण …और पढ़ें
HighLights
- रायपुर के बहुचर्चित गृह निर्माण ऋण घोटाले की जांच पूरी
- तत्कालीन अध्यक्ष और प्रबंधकों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट
- ₹1.86 करोड़ का लोन बना ₹104 करोड़ का डूबत कर्ज
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। तीन दशक पुराने चर्चित गृह निर्माण ऋण घोटाले में आखिरकार जांच निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू और सहकारी आवास संघ भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा के खिलाफ विशेष अदालत में 15 हजार पन्नों का चालान पेश किया है।
एक करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण हड़पा
आरोप है कि तीनों ने सरकारी आवास योजना के नाम पर 186 सदस्यों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण हड़प लिया, जो वर्षों तक वसूली नहीं होने के कारण ब्याज सहित बढ़कर 104 करोड़ रुपये का डूबत ऋण बन गया। ईओडब्ल्यू रायपुर में दर्ज अपराध की विवेचना के बाद शुक्रवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में चालान पेश किया गया। यह मामला करीब 30 वर्ष पुराने घोटाले और 26 वर्ष पहले दर्ज अपराध से जुड़ा है।
186 सदस्यों के नाम पर स्वीकृत कराए गए थे फर्जी ऋण
जांच में सामने आया कि वर्ष 1995 से 1998 के बीच जरूरतमंद लोगों के लिए संचालित सरकारी आवास योजना के तहत आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के 186 सदस्यों के नाम पर प्रति सदस्य एक-एक लाख रुपये की दर से कुल 1.86 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया। आरोप है कि ऋण स्वीकृत कराने के लिए कूटरचित दस्तावेज, फर्जी उपयोगिता प्रमाण-पत्र और भवन निर्माण पूर्णता प्रमाण-पत्र तैयार किए गए।
मौके पर न मकान मिले, न ऋणी
ईओडब्ल्यू की भौतिक जांच में बड़ा राजफाश हुआ। जिन स्थानों पर मकान बने होने का दावा किया गया था, वहां न तो कोई निर्माण मिला और न ही ऋण लेने वाले सदस्य। कई लोगों के नाम और पते भी रिकार्ड से मेल नहीं खाए। इससे स्पष्ट हुआ कि पूरी योजना कागजों में खड़ी कर सरकारी धन का गबन किया गया।
जांच में सामने आई साजिश
विवेचना के अनुसार थावरदास माधवानी, बसंत कुमार साहू और प्रदीप कुमार निखरा ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए फर्जी ऋण स्वीकृत कराए और राशि का आपस में बंटवारा कर लिया। जांच में यह भी पाया गया कि बिना वास्तविक जांच किए ऋण आवेदन आगे बढ़ाए गए और उपयोगिता व निर्माण पूर्णता के फर्जी प्रमाण-पत्र जारी किए गए।
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ब्याज ने बढ़ाया घोटाले का आकार
ईओडब्ल्यू के मुताबिक वर्ष 1995-98 में लिया गया 1.86 करोड़ रुपये का फर्जी गृह निर्माण ऋण, 31 दिसंबर 2025 तक मूलधन और ब्याज मिलाकर 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण में बदल गया। इससे राज्य सहकारी आवास संघ को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।




