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रायगढ़ में किसानों को मुआवजा वितरण में बिचौलियों और लंबी कतारों का दौर खत्म, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म से सीधे बैंक खातों में राशि पहुंच रही

रायगढ़ में किसानों को मुआवजा वितरण में बिचौलियों और लंबी कतारों का दौर खत्म, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म से सीधे बैंक खातों में राशि पहुंच रही

15 अगस्त विज्ञापन

गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़ :  रायगढ़ जिले में किसानों के लिए मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में एक नई क्रांति आ गई है। पहले जहां बिचौलियों की मनमानी और लंबी-लंबी कतारों के कारण किसानों को महीनों इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे उनके बैंक खातों में राशि पहुंच रही है। यह बदलाव न केवल समय की बचत कर रहा है, बल्कि पारदर्शिता भी ला रहा है।

कलेक्टर रायगढ़ ने इस डिजिटल योजना का औपचारिक शुभारंभ किया। हालिया बाढ़, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित 25 हजार से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल चुका है। प्रति हेक्टेयर 10,000 से 20,000 रुपये तक का मुआवजा मात्र 48 घंटों में उनके आधार-लिंक्ड खातों में जमा हो रहा है। किसान अब ‘किसान मित्र’ ऐप या सरकारी पोर्टल पर आवेदन भरते हैं, जहां जियो-टैगिंग और ड्रोन सर्वे से फसल नुकसान का सत्यापन होता है।

बिचौलियों का खेल पूरी तरह समाप्त हो गया है। पहले ये लोग 10-20 प्रतिशत कमीशन वसूलते थे और कागजी कार्रवाई में हेराफेरी करते थे। जिले भर में 15 से अधिक बिचौलियों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। ग्राम पंचायतों और किसान संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे किसान खुद डिजिटल प्रक्रिया सीख रहे हैं। कलेक्टर ने कहा, “यह डिजिटल इंडिया का सच्चा स्वरूप है, जहां अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचे।”

तकनीकी रूप से यह सिस्टम छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नरवा, गरवा, घुरवा, बारी’ योजना से जुड़ा हुआ है। किसान ऐप पर फसल सर्वे अपलोड करते हैं, ई-कोश सिस्टम सत्यापन करता है और आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान तुरंत हो जाता है। राज्य स्तर पर 80 प्रतिशत मुआवजा वितरण डिजिटल हो चुका है। बुजुर्ग किसानों के लिए कॉमन सर्विस सेंटर्स पर मदद उपलब्ध है और हेल्पलाइन नंबर सक्रिय हैं।

किसानों की प्रतिक्रियाएं उत्साहजनक हैं। पुधनपाली के रामू यादव कहते हैं, “पहले 15 दिन का इंतजार, अब दो दिन में पैसा घर पर।” महिलाकिसान सीता बताती हैं कि ऐप सरल है और बिचौलियों की जरूरत ही नहीं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की चुनौती बनी हुई है, जिसे दूर करने के लिए विशेष अभियान चल रहे हैं। भविष्य में फसल बीमा को इस सिस्टम से लिंक करने की योजना है।

इस बदलाव का आर्थिक प्रभाव भी गहरा है। 1 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा वितरण तेजी से हो रहा है, जिससे किसान कर्जमुक्त हो रहे और नई फसल के लिए निवेश कर पा रहे हैं। रायगढ़ अब कृषि हब के रूप में उभर रहा है। यह मॉडल दूसरे जिलों के लिए प्रेरणा बनेगा और किसानों का जीवन बदलेगा।

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